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नीम करोली बाबा के 10 अनमोल वचन जो बदल देंगे आपका जीवन | Neem Karoli Baba Teachings

नीम करोली बाबा के 10 अनमोल वचन जो बदल देंगे आपका जीवन | Neem Karoli Baba Teachings

"सबका भला करो, सबको भोजन कराओ, राम नाम जपो और प्रभु पर अटूट विश्वास रखो।"

आज की इस भागदौड़ भरी, आधुनिक और अत्यधिक प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया में हर व्यक्ति सफलता, धन और भौतिक साधनों के पीछे भाग रहा है। लेकिन इस अंधी दौड़ के बीच जो चीज़ सबसे तेज़ी से खो रही है, वह है—आंतरिक शांति (Inner Peace), संतोष और प्रेम। मानसिक तनाव, अकेलापन और अनिश्चितता आज मानव समाज की सबसे बड़ी चुनौतियाँ बन चुकी हैं।

ऐसे समय में, जब मन भटकता है और कोई सही राह दिखाई नहीं देती, तब देवभूमि उत्तराखंड के सुरम्य वातावरण में बसे श्री कैंची धाम (Shri Kainchi Dham) के अलौकिक संत नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba)—जिन्हें उनके भक्त प्यार से "महाराज जी" कहते हैं—के विचार अंधेरे में प्रकाश स्तंभ की तरह हमारा मार्ग रोशन करते हैं।

महाराज जी कोई भारी-भरकम दार्शनिक प्रवचन नहीं देते थे। न ही उन्होंने कोई बड़ी-बड़ी शास्त्रीय पुस्तकें लिखीं। उन्होंने केवल अपनी सरल, सहज और प्रेम से भरी वाणी और लीलाओं के माध्यम से मानवता को जीने का सच्चा ढंग सिखाया। यही कारण है कि भारत के गाँव-गाँव से लेकर अमेरिका और यूरोप की सिलिकॉन वैली तक—एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स (Steve Jobs), मेटा के मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg), हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स और प्रसिद्ध लेखक राम दास (बाबा राम दास) जैसी हस्तियों ने महाराज जी की शरण में आकर अपने जीवन की नई दिशा खोजी।

आइए, महाराज जी के उन 10 अनमोल वचनों (10 Precious Teachings) को गहराई से समझें, जो आज भी करोड़ों दिलों को शांति दे रहे हैं और जिन्हें अपने जीवन में उतारकर आप भी हर संकट से पार पा सकते हैं।


महाराज जी के 10 दिव्य जीवन-सूत्र (The 10 Golden Principles)

1. "सबको भोजन कराओ" (Feed Everyone / Serve All)

महाराज जी का सबसे पहला और सबसे प्रिय संदेश था—"सबको भोजन कराओ" (Feed People)। कैंची धाम आश्रम हो या महाराज जी का कोई भी स्थान, वहाँ आने वाला कोई भी व्यक्ति कभी भूखा नहीं लौट सकता।

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
महाराज जी का मानना था कि जब तक मनुष्य का पेट खाली होता है, तब तक उसके मन में ईश्वर भक्ति या ज्ञान की बातें प्रवेश नहीं कर सकतीं। भोजन कराना केवल शरीर की भूख मिटाना नहीं है, बल्कि यह सामने वाले के भीतर बैठे ईश्वर की पूजा करना है। जब आप किसी भूखे व्यक्ति को प्रेम से भोजन कराते हैं, तो आप प्रत्यक्ष रूप से नारायण की सेवा कर रहे होते हैं।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
अपने दैनिक जीवन में क्षमता अनुसार किसी ज़रूरतमंद की मदद करें। अपने घर आए अतिथि, कर्मचारी या किसी असहाय को कभी खाली हाथ न लौटाएं। भोजन बाँटना निस्वार्थ सेवा (Selfless Service) का सबसे सरल रूप है, जो आपके दिल से अहंकार को मिटा देता है।

💡 कैंची धाम की पावन परंपरा:

कैंची धाम में प्रतिदिन बनने वाला पूड़ी और आलू का प्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि महाराज जी का दिव्य आशीर्वाद माना जाता है। कहा जाता है कि इस प्रसाद को ग्रहण करते ही मन का भारीपन समाप्त हो जाता है।

2. "सबसे प्रेम करो, किसी से घृणा मत करो" (Love Everyone, Hate No One)

महाराज जी के पास आने वाले लोग किसी भी जाति, धर्म, राष्ट्र या सामाजिक वर्ग के क्यों न हों—महाराज जी ने सबको एक समान वात्सल्य और प्रेम दिया। उनके लिए न कोई अमीर था, न गरीब; न कोई देशी था, न विदेशी।

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
घृणा और द्वेष मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु हैं। जब हम किसी से नफरत करते हैं, तो हम सबसे पहले अपने ही मन की शांति को नष्ट करते हैं। प्रेम ही इस ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्ति है। महाराज जी कहते थे कि यदि तुम ईश्वर से प्रेम करना चाहते हो, तो उसके बनाए हर प्राणी से प्रेम करना सीखो।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
दूसरों के प्रति मन में कड़वाहट, ईर्ष्या और पूर्वाग्रह (Prejudice) को छोड़ें। लोगों को उनकी कमियों के साथ स्वीकार करें। जब आप बिना किसी शर्त के प्रेम बाँटना शुरू करते हैं, तो पूरी दुनिया आपकी मित्र बन जाती है।

3. "राम नाम जपो" (Chant God's Name)

महाराज जी लगातार अपने कंबल के अंदर माला जपते रहते थे या मन ही मन प्रभु नाम का स्मरण करते रहते थे। वे अक्सर अपने भक्तों को कहते थे—"राम नाम जपते रहो, यही तुम्हें सब संकटों से बचाएगा।"

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
कलयुग में मन को एकाग्र और शांत रखने का सबसे सुलभ माध्यम 'नाम जप' (Chanting/Mantra Meditation) है। जब हमारा मन व्यर्थ की चिंताओं और नकारात्मक विचारों से घिरा होता है, तब ईश्वर का नाम हमारे अवचेतन मन को शुद्ध करता है और हमें एक अदृश्य सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
चाहे आप काम कर रहे हों, यात्रा कर रहे हों या विश्राम कर रहे हों—अपने मन में प्रभु के नाम (राम, हनुमान, ओम, या जो भी आपका ईष्ट हो) का निरंतर जाप करने का अभ्यास करें। यह अभ्यास आपके ध्यान और मानसिक स्पष्टता को कई गुना बढ़ा देता है।

4. "सब पास" (Sub Paas / Everything Will Be Fine)

जब भी कोई भक्त अपनी गंभीर से गंभीर समस्या, बीमारी, नौकरी का संकट या पारिवारिक क्लेश लेकर महाराज जी के पास रोते हुए आता था, तो महाराज जी हंसकर केवल एक वाक्य कहते थे—"सब पास!" (सब ठीक हो जाएगा, सब परीक्षा में उत्तीर्ण होंगे)।

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
"सब पास" केवल दो शब्द नहीं हैं, बल्कि यह ईश्वरीय विधान पर परम विश्वास और आशा की किरण हैं। इसका अर्थ है कि जीवन में आने वाली हर कठिन परिस्थिति केवल एक परीक्षा (Test) है, और यदि तुम्हारा विश्वास डिगा नहीं, तो ईश्वर तुम्हें इस परीक्षा में अवश्य सफल (Pass) कराएंगे।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
जब भी जीवन में निराशा या असफलता का दौर आए, घबराएं नहीं। शांत रहें और मन में दोहराएं कि यह समय भी बीत जाएगा और ईश्वर का मंगलमय विधान ही पूरा होगा। सकारात्मकता ही सफलता की पहली कुंजी है।

5. "सत्य बोलो" (Speak Truth / Truth is God)

महाराज जी का स्पष्ट उपदेश था—"सत्य ही ईश्वर है।" उन्होंने हमेशा अपने भक्तों को जीवन में पूरी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा (Integrity) के साथ जीने की प्रेरणा दी।

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
एक झूठ को छुपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं, जिससे मन में भय और मानसिक तनाव उत्पन्न होता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति सत्य के मार्ग पर चलता है, वह निर्भय होता है। सत्य बोलने वाले व्यक्ति के पीछे स्वयं ईश्वर का बल होता है।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
अपने व्यापार, नौकरी, रिश्तों और दैनिक व्यवहार में पारदर्शिता और सच्चाई बनाए रखें। क्षणिक लाभ के लिए असत्य का सहारा न लें। सत्य का आचरण आपको आत्म-बल और समाज में वास्तविक सम्मान दिलाता है।

6. "अहंकार त्यागो" (Give Up Ego and Pride)

महाराज जी स्वयं साक्षात सिद्ध संत थे, फिर भी वे इतने सादे वस्त्र (एक साधारण कम्बल) में रहते थे और कभी किसी से अपनी पूजा नहीं करवाते थे। जब भी कोई उनकी प्रशंसा करता, वे तुरंत कहते—"सब हनुमान जी करते हैं, हम तो कुछ नहीं हैं।"

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
अहंकार (Ego) मनुष्य के पतन का सबसे मुख्य कारण है। जब व्यक्ति सोचने लगता है कि "मैंने यह किया" या "मेरी वजह से सब चल रहा है", तो वह ईश्वर की कृपा के द्वार बंद कर देता है। नम्रता और निरहंकारिता ही वास्तविक ज्ञान का प्रमाण हैं।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
अपनी सफलताओं, धन, पद या ज्ञान का घमंड न करें। यह याद रखें कि जो कुछ आपके पास है, वह ईश्वर का दिया हुआ उपहार है। जीवन में जितना अधिक ऊंचे उठें, उतने ही अधिक नम्र और दयालु बनें।

"ईश्वर को खोजना नहीं पड़ता, वह तो सबमें विद्यमान है। तुम बस सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो और प्रभु का नाम जपते रहो।"
— नीम करोली बाबा

7. "माफ करना सीखो" (Forgive and Let Go)

महाराज जी के पास कई बार ऐसे लोग भी आते थे जिन्होंने पहले उनके विरुद्ध बातें की थीं या आश्रम के प्रति दुराग्रह रखा था। लेकिन महाराज जी उन्हें भी उसी वात्सल्य से गले लगाते थे जैसे किसी अपने प्रिय बच्चे को।

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
किसी की गलती को दिल से लगा कर रखना और बदले की भावना पालना अपने ही भीतर जहर घोलने जैसा है। क्षमा करने का अर्थ यह नहीं है कि आप किसी के गलत व्यवहार को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि इसका अर्थ यह है कि आप अपने मन को उस व्यक्ति के नकारात्मक प्रभाव से मुक्त कर रहे हैं।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
बीती बातों को भूलना सीखें (Let It Go)। यदि किसी ने आपका दिल दुखाया है, तो उसे ईश्वर के भरोसे छोड़कर आगे बढ़ें। क्षमा करने से आपका हृदय विशाल और मन हल्का हो जाता है।

8. "हर प्राणी में ईश्वर को देखो" (See Divinity in All Beings)

महाराज जी अक्सर कहते थे कि मंदिर की मूर्तियों में ईश्वर को खोजना बहुत आसान है, लेकिन असली साधना हर जीवित इंसान, पशु और पक्षी में ईश्वर के अंश को देखना है।

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
अद्वैत और समभाव का यही मूल मंत्र है। जब आप हर व्यक्ति में ईश्वर की झलक देखने लगते हैं, तो आपके मन से भेदभाव, कटुता और असम्मान का भाव सदा के लिए समाप्त हो जाता है।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
चाहे आपका ऑफिस का सफाईकर्मी हो, ऑटो चालक हो या आपका उच्च अधिकारी—सबके साथ आदर और सहृदयता का व्यवहार करें। पशु-पक्षियों के प्रति दया का भाव रखें।

9. "धन केवल सेवा का साधन है" (Money is for Service, Not Greed)

महाराज जी ने कभी अपने लिए धन एकत्र नहीं किया। जो भी दान या भेंट आश्रम में आती थी, वे उसे तुरंत भंडारे, गरीबों की मदद, अस्पताल और जनसेवा के कार्यों में लगा देते थे।

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
धन बुरा नहीं है, लेकिन धन का मोह और लालच बुरा है। धन का वास्तविक उपयोग केवल अपनी बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने और समाज के असहाय लोगों की भलाई के लिए है। खाली हाथ आए थे और खाली हाथ ही जाना है—यह शाश्वत सत्य है।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
अपनी कमाई का एक निश्चित अंश (जैसे 5% या 10%) परोपकार, शिक्षा, स्वास्थ्य या समाज सेवा में अवश्य लगाएं। दान करने से धन घटता नहीं, बल्कि पवित्र और बरकत वाला बनता है।

10. "चिंता मत करो, ईश्वर पर पूर्ण समर्पण रखो" (Surrender Completely to God)

महाराज जी का अंतिम और सबसे शक्तिशाली मंत्र था—"चिंता मत करो!"। वे कहते थे कि जब तुमने अपनी नाव ईश्वर के हाथों में सौंप दी है, तो फिर डूबने का डर कैसा?

आध्यात्मिक और व्यावहारिक अर्थ:
अधिक सोचना (Overthinking) और भविष्य की चिंता करना हमारे वर्तमान को बर्बाद कर देता है। जब हम अपना सर्वोत्तम कर्म करते हैं और परिणाम को ईश्वर की इच्छा पर छोड़ देते हैं, तो इसे 'शरणागति' (Surrender) कहते हैं। जब आप प्रभु की शरण में आ जाते हैं, तो आपकी जिम्मेदारी ईश्वर की जिम्मेदारी बन जाती है।

इसे अपने जीवन में कैसे अपनाएं?
कर्म पूरे मनोयोग से करें, लेकिन परिणाम की चिंता में अपनी रातों की नींद न खोएं। अपनी सभी चिंताओं को प्रभु के चरणों में समर्पित कर दें और निश्चिंत होकर जीवन जिएं।


वैश्विक हस्तियों ने क्यों अपनाई महाराज जी की राह? (Global Impact)

यह केवल भारत के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए कौतूहल और प्रेरणा का विषय है कि आखिर कैसे एक भारतीय संत ने पश्चिमी दुनिया के महानतम विचारकों को प्रभावित किया:

  • स्टीव जॉब्स (Steve Jobs): 1970 के दशक में जब स्टीव जॉब्स अपने जीवन में दिशाहीन महसूस कर रहे थे, तब वे अध्यात्म और प्रेरणा की खोज में भारत आए और कैंची धाम पहुँचे। महाराज जी के विचारों ने उनके सोचने का नज़रिया बदल दिया, जिसने आगे चलकर एप्पल जैसी क्रांतिकारी कंपनी की नींव रखी।
  • मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg): जब फेसबुक अपने शुरुआती दौर में कठिनाइयों से गुज़र रहा था, तब स्टीव जॉब्स ने ही मार्क को कैंची धाम जाने की सलाह दी थी। मार्क जुकरबर्ग ने कैंची धाम में समय बिताया और वहाँ से एक नई स्पष्टता और दृष्टि लेकर लौटे।
  • बाबा राम दास (रिचर्ड अल्बर्ट - Harvard Professor): हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड अल्बर्ट जब महाराज जी से मिले, तो महाराज जी के असीम प्रेम और अंतर्यामी ज्ञान ने उनका जीवन बदल दिया। वे 'बाबा राम दास' बने और उनकी प्रसिद्ध पुस्तक "Be Here Now" ने लाखों पश्चिमी युवाओं को भारतीय अध्यात्म और महाराज जी से जोड़ा।
  • डॉ. लैरी ब्रिलियंट (Larry Brilliant - WHO Epidemiologist): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रसिद्ध डॉक्टर लैरी ब्रिलियंट ने महाराज जी के निर्देश पर भारत से चेचक (Smallpox) के उन्मूलन में ऐतिहासिक योगदान दिया।

दैनिक जीवन में इन वचनों को उतारने के 4 व्यावहारिक चरण

महाराज जी की शिक्षाओं को जीवन में लागू करने के लिए आपको सब कुछ छोड़कर संन्यासी बनने की आवश्यकता नहीं है। आप अपने गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी इन 4 सरल चरणों का पालन कर सकते हैं:

चरण 1: प्रभात स्मरण (Morning Routine)

सुबह उठते ही 5 मिनट शांत बैठें। महाराज जी का स्मरण करें और संकल्प लें कि आज आप किसी का दिल नहीं दुखाएंगे और जो संभव हो सेवा करेंगे।

चरण 2: निस्वार्थ भोजन सेवा (Daily Food Sharing)

दिन में कम से कम एक बार पक्षियों को दाना डालें, गली के जानवरों को भोजन दें या किसी भूखे व्यक्ति की मदद करें।

चरण 3: सजग मन और नाम जप (Mindful Chanting)

काम के दौरान या तनाव महसूस होने पर 2 मिनट का ब्रेक लें और मन ही मन 'राम-राम' या 'जय हनुमान' का जाप करें।

चरण 4: रात्रि कृतज्ञता (Evening Gratitude & Forgiveness)

सोने से पहले दिन भर की सभी चिंताओं को प्रभु को सौंप दें। यदि किसी ने आपका दिल दुखाया है, तो उसे क्षमा करके हल्की सांस लें और सो जाएं।

श्री कैंची धाम दर्शन: भक्तों के लिए जरूरी जानकारी

यदि आप महाराज जी के पावन आश्रम श्री कैंची धाम (Shri Kainchi Dham) जाने का विचार कर रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

विषय विवरण
स्थान (Location) भवाली-अल्मोड़ा रोड, जिला नैनीताल, उत्तराखंड (भारत)
निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम (Kathgodam - KGM), दूरी लगभग 38 किमी
निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर (Pantnagar - PGN), दूरी लगभग 70 किमी
उत्तम समय (Best Time) मार्च से जून और अक्टूबर से फरवरी (15 जून को वार्षिक स्थापना दिवस भंडारा होता है)
मुख्य नियम आश्रम के अंदर फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी सख्त मना है। शांति और सादगी बनाए रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)

प्र1: नीम करोली बाबा कौन थे? क्या वे हनुमान जी के अवतार थे?

उत्तर: नीम करोली बाबा 20वीं सदी के महान भारतीय संत थे। उनके अनन्य भक्त और साधक उन्हें साक्षात हनुमान जी का रूप मानते हैं। उनका संपूर्ण जीवन चमत्कार, वात्सल्य और निष्काम सेवा का अनुपम उदाहरण था।

प्र2: नीम करोली बाबा का मूल मंत्र क्या है?

उत्तर: महाराज जी का मूल मंत्र है—"सबको भोजन कराओ, सबसे प्रेम करो, सब पर दया करो और राम नाम का जप करो।" इसके अलावा उनका कहा वाक्य "सब पास" भक्तों के लिए सबसे बड़ा संबल है।

प्र3: क्या कैंची धाम में दर्शन के लिए कोई शुल्क या प्री-बुकिंग लगती है?

उत्तर: नहीं, श्री कैंची धाम आश्रम में दर्शन बिल्कुल नि:शुल्क हैं और किसी प्रकार की एडवांस बुकिंग या पास की आवश्यकता नहीं होती।

निष्कर्ष: जीवन को रूपांतरित करने की कुंजी

नीम करोली बाबा के 10 अनमोल वचन केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि अपने दैनिक आचरण में उतारने के लिए हैं। जब आप अपने जीवन से नफरत, अहंकार और चिंता को निकालकर प्रेम, सेवा और प्रभु-विश्वास को स्थान देते हैं, तो आपका जीवन अपने आप आनंद और शांति से भर जाता है।

"चिंता छोड़िए, प्रभु की शरण में रहिए—सब पास!"

जय नीम करोली बाबा! जय श्री राम!

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