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Navratri 2021 8th Day: Mata Mahagauri

नवरात्रि अष्टम दिवस: माता महागौरी  नवरात्रि के अष्टम दिवस पर माता महागौरी की उपासना की जाती है। माता महागौरी के इस दिव्य स्वरूप में उनके सभी वस्त्र और आभूषण सफेद है अतः इसीलिए माता को श्वेतांभरधरा भी कहा जाता है। मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप में माता महागौरी की पूजा करने से संतान संबंधी कष्टों से मुक्ति मिलती है। माता महागौरी की उपासना से भक्तो के सभी पाप नष्ट हो जाते है यहां तक की पूर्व संचित पाप भी नष्ट हो जाते है। अष्टमी के दिन महिलाएं अटल सुहाग की कामना से माता महागौरी को चुनरी भेट करती हैं। Mata Mahagauri Ka Swaroop Varnan माता महागौरी की चार भुजाएं हैं, इनके ऊपर का दाहिना हाथ अभय मुद्रा में है, और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। उपर वाले बायें हाथ में डमरू और नीचे का बायां हाथ वर मुद्रा में है। माता महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है।  अत्यन्त शांत रहने वाली माता महागौरी की उपासना से भक्तों के सभी पाप संताप और दुःख स्वयं नष्ट हो जाते हैं। माता की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता महागौरी के ऊपर गंगा जल डाला तभी से इनका रंग पूर्ण सफेद हो गया। Mata Mahagauri Mantra श्वेत
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Navratri 2021 seventh Day : Maa Kalratri

Maa Kalratri: Navratri Saptam Diwas नवरात्रि के सप्तम दिवस की अधिष्ठात्री देवी मां कालरात्रि है। मां कालरात्रि माता दुर्गा का सप्तम स्वरूप माना जाता है। मां कालरात्रि परम दयालु और करुणामई है। माता अपने भक्तो को हर संकट से उबरकर उनका कल्याण करती है। Maa Kalratri Ka Swaroop मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यंत भयानक है परंतु ये सदैव शुभ फल देने वाली माता है। इसी कारण इनका एक नाम शुंभकारी भी है । मां कालरात्रि (Maa Kalratri) दुष्टों का नाश करने वाली माता है। दानव, दैत्य,भूत, प्रेत, राक्षस आदि इनके नाम के स्मरण मात्र से ही भयभीत होकर भाग जाते है। ये ग्रह बाधाओं को भी दूर करने वाली है। Maa Kalratri Rahasya मां कालरात्रि के शरीर का रंग काला और मां के बाल रौद्र रूप में होने के कारण बिखरे हुए दिखाई देते है। मां कालरात्रि का वाहन गधा है। शास्त्रों में देवी कालरात्रि को त्रिनेत्री कहा गया है। इनके तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह विशाल हैं, जिनमें से बिजली की तरह किरणें प्रज्वलित हो रही हैं।  इनके बाल खुले और बिखरे हुए हैं जो की हवा में लहरा रहे हैं। गले में विद्युत की चमक वाली माला है। इनकी नाक स

6th Day Of Navratri: Maa Katyayani

Maa Katyayani: 6th Day Of Navratri ममतामयी मां दुर्गा के षष्ठम स्वरूप का नाम मां कात्यायनी है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर माता आदिशक्ति ने उनके गृह में अवतार धारण किया। तत्पश्चात माता का नाम कात्यायनी पड़ा। पवित्र नवरात्रि के छठे दिन माता कात्यायनी की पूजा पूर्ण विधि विधान के साथ की जाती है। Maa Katyayani Mantra ॥ स्तुति मंत्र॥ चंद्रहासोज्ज्वलकरा, शार्दूलवरवाहना।  कात्यायनी शुभं दद्यात्, देवी दानवघातनी।। (चंद्रहास की भांति देदीप्यमान, शार्दूल अर्थात् शेर पर सवार और दानवों का विनाश करने वाली मां कात्यायनी हम सबके लिये शुभदायी हों) भोग : माता कात्यायनी को शहद का भोग लगाने से उपवास करने वाले की आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है। Maa Katyayani Swaroop Varnan मां कात्यायनी क्रोध का वो स्वरूप है जो समस्त संसार की नकारात्मकता को समाप्त करके सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर उसका समस्त संसार में प्रसार करती है। मां कात्यायनी सदैव अपने भक्तो पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखती है। अपने प्रत्येक सच्चे भक्त की हर मनोकामना मां सदैव पूरा करती है। Maa Katyayani image Maa Katyayani Prakatya मा

Navratri 2021 Fifth Day : Maa Skandamata

Navratri Pujan: Skandamata प्रिय भक्तों नवरात्रि के पंचम दिवस में माता स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता, माता आदिशक्ति के ही पांचवें स्वरूप को कहा जाता है। इस स्वरूप में माता का नाम स्कंद इसलिए पड़ा क्योंकि माता के पुत्र भगवान स्वामी कार्तिकेय का नाम स्कंद है और जो स्कंद की माता हैं उन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। Skandamata Ka  Swaroop आदि शक्ति के इस रूप में माता की चार भुजाएं हैं। माता अपने दोनों हाथ में कमल के पुष्प को धारण किए हुए हैं और अपने एक हाथ से कुमार कार्तिकेय को गोद लिए हुए हैं।  Skandamata Ka Divya Darshan  मोक्ष के द्वार खोलने वाली मां स्कंदमाता परम सुखदाई है। पौराणिक कथाओं में यह सुनने को मिलता है कि स्कंदमाता की उपासना से सारी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं और प्राणियों के सारे मनोरथ सफल होते हैं।  Skandamata Ka Rang  स्कंदमाता के दिव्य स्वरूप का वर्णन करना सहज नहीं है। पौराणिक मान्यताओं और कथाओं के अनुसार स्कंदमाता का रंग सफेद कहा गया है। देवी भागवत में कहा गया है कि माता स्कंदमाता का प्राकट्य मां गौरी से ही हुआ था इसलिए उनका रंग धवल यानी सफेद है।  नवरात्

Navratri 2021 Fourth Day: Kushmanda Mata

Navratri: Kushmanda Mata नवरात्रि के चतुर्थ दिवस की महिमामयी देवी का नाम माता कूष्माण्डा है। इशत हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना करने वाली देवी को ही कूष्माण्डा के नाम से संबोधित किया जाता है। कूष्माण्डा देवी की कृपा से ही श्रृष्टि का विस्तार संभव हुआ।  Kushmanda Mata Ka Swaroop कूष्माण्डा देवी की कांति और आभा सूर्य के समान हैं। देवी का यह स्वरूप अन्नपूर्णा कहलाता है। प्रकृति का दोहन और लोगो को भूल प्यास से व्याकुल देखकर माता ने शाकुंभरी का रूप धरा। शाक से धरती को पल्लवित किया और सताक्षी बनकर असुरों का संहार किया। कूष्माण्डा देवी उदर की देवी है और इन्हें प्रकृति और पर्यावरण की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। कूष्माण्डा देवी की आराधना के बिना जप और ध्यान कभी सम्पूर्ण नही होते। माता के इस रूप की आराधना से तृप्ति और तुष्टि दोनो प्राप्त होते है। माता कूष्माण्डा अपने भक्तो के सभी संकटों को दूर करके उनके रोग,शोक का निवारण करती हुवि उनके सौभाग्य को बढ़ाकर उनके स्वास्थ्य और आयु में वृद्धि करती हुवी उनको बुद्धि प्रदान करती है। मां दुर्गा की चौथी शक्ति का नाम मां कुष्मांडा हैं... मां की आं

Navratri 2021 Day Third : Chandraghanta Mata

Chandraghanta Mata: Navratri 3rd Day प्रिय भक्त जनों , नवरात्रि के तीसरे दिन आदिशक्ति के मनोहारी स्वरूप माता चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। देवी का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है । माता चंद्रघंटा के स्वरूप की व्याख्या माता के इस स्वरूप में माता के माथे पे घंटे के आकार का अर्ध चंद्र विद्यमान है इसलिए माता को चंद्रघंटा कहा जाता है। इनके शरीर का रंग सोने की आभा के समान बहुत चमकीला है । माता चंद्रघंटा की दस भुजाए है जो आनेको अस्त्र और शस्त्र से विभूषित है। चंद्रघंटा माता की पूजा और आराधना का लाभ माता आदिशक्ति के चंद्रघंटा स्वरूप की जो भी मनुष्य सच्चे मन और श्रद्धा के साथ आराधना करता हैैउसे सम्मान ,यश, और कीर्ति की प्राप्ति होती है। माँ चन्द्रघण्टा के नाम का सार तत्व देवी माँ के तृतीय ईश्वरीय स्वरूप माँ चन्द्रघण्टा की महिमा अपार है। एक ऐसी स्थिति जिसमें हमारा अस्त-व्यस्त मन एकाग्रचित्त हो जाता है। अपने मन से भागे नहीं क्योंकि यह मन एक प्रकार से दैवीय रूप का प्रतीक, अभिव्यक्ति है।  यही दैवीय रूप दुःख, विपत्ति, भूख और यहाँ तक की शान्ति में भी मौजूद है। सार यह कि सबको एक साथ लेकर चल

Navratri 2021: Brahmacharini Mata | Navratri Second Day 2021

Navratri 2021: Brahmacharini Mata प्रिय भक्तो , नवरात्रि के द्वितीय दिवस पर आज हम आपको माता आदिशक्ति के दिव्य श्वेत स्वरूप ब्रह्मचारिणी माता के विषय में बताएंगे। नवरात्रि के द्वितीय दिवस पर ब्रह्मचारिणी माता के दिव्य एवं मनमोहक स्वरूप की पूजा की जाती है। Brahmacharini ka arth ब्रह्म का अर्थ है तप और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। अतः हम कह सकते है की जो तप का आचरण करती है उनको ही ब्रह्मचरणी माता के रूप में पूजा जाता है। Brahmacharini Mata ke Swaroop ka Varnan ब्रह्मचारिणी माता के ये स्वरूप ज्योतिर्मय है और माता के दाहिने हाथ में जप माला और बाए हाथ में कमंडल है । माता ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप ,त्याग, और सय्यम की वृद्धि होती है । Brahmacharini Mata ka naamkaran sanskar पर्वत राज हिमालय की पुत्री देवी पार्वती ने भगवान शंकर को अपने पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षो तक घोर तप किया जिसके कारण माता को ब्रह्मचारिणी के नाम से संबोधित किया गया। माता आदिशक्ति के इसी स्वरूप की कठिन तपस्या से भगवान शिव ने प्रसन्न होकर माता पार्वती से विवाह किया था। Brahmacharini Mata Ke Rang ka varnan ब्र