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Khul gaya Kainchi Dham -Neem Karoli Baba

खुल गया कैंची धाम मंदिर, मंदिर परिसर में करना होगा इन नियमों का पालनउत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम के कपाट 1 जुलाई, बुधवार से खोल दिए गए हैं। भक्तों के लिए 24 मार्च से कैंची धाम के कपाट बंद कर दिए गए थे। एक बार फिर से कपाट खुलने से यहां पर भक्तों का आगमन शुरू हो जाएगा।
कैंची धाम की बहुत मान्यता हैं, यहां पर देश- विदेश से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता है। यहां आने मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। हर साल 15 जून को लगता है भव्य भंडाराहर साल 15 जून को कैंची धाम में विशेष भंडारा लगता है। 15 जून को कैंची धाम के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाबा नीब करौरी महाराज जी ने 15 जून 1964 को कैंची धाम में हनुमान जी की प्रतिमा की प्रतिष्ठा की थी। इस दिन देश-विदेश से यहां लोग बाबा के दर्शन करने और पावन प्रसाद को ग्रहण करने आते हैं। इस बार कोरोना वायरस की वजह से यहां पर भव्य भंडारे का आयोजन नहीं किया गया था। नियमों का पालन करना होगा अनिवार्य
दर्शन का समय कैंची धाम के कपाट भक्तों के लिए 1 जुलाई से खोल दिए गए हैं। भ…
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हनुमान वडवानल स्तोत्र लिरिक्स इन तेलुगू | Hanuman Vadvanal Stotra in Telugu

హనుమాన్ వాద్వానల్ మూల కీర్తి - శ్రీ కత్తెర ధామ్ | హనుమాన్ వాద్వనాల్ స్తోత్ర మహిమా - శ్రీ కైంచి ధామ్శ్రీ హనుమాన్ వాద్వానాల్ స్తోత్రను త్రతయుగలో శ్రీలంక రావణ తమ్ముడు విభీషణ్ జి స్వరపరిచారు. ట్రెటాయగ్ నుండి ఈ రోజు వరకు, ఈ మంత్రం దశలవారీగా దాని పరిపూర్ణతకు రుజువు ఇస్తోంది.
శ్రీ హనుమాన్ వాద్వానాల్ స్తోత్రం జపించడం ద్వారా కూడా అతిపెద్ద సమస్య నివారించబడుతుంది.శ్రీ హనుమాన్ వాద్వానల్ మూలం చాలా పెద్ద సమస్య ఉన్నప్పుడు మాత్రమే ఉపయోగించబడుతుంది. అతి పెద్ద సమస్య కూడా జపించడం ద్వారా తప్పించుకుంటుంది మరియు అన్ని సంక్షోభాలను నాశనం చేయడం ద్వారా ఆనందం మరియు శ్రేయస్సు లభిస్తుంది.
శ్రీ హనుమాన్ వాద్వానాల్ స్తోత్రం యొక్క ఉపయోగం శత్రువులు, ఉపన్యాసం, తంత్ర-మంత్రం, బంధన్, మారన్ వాడకం మొదలైనవి చేసే వేదన చర్యలను శాంతపరుస్తుంది మరియు అన్ని రకాల అడ్డంకులు తొలగిపోతాయి.చదివే విధానంఈ ప్రయోగాన్ని శనివారం పవిత్ర సమయంలో ప్రారంభించండి. ఉదయం, స్నానం, ధ్యానం మొదలైన వాటి తరువాత, హనుమంతుడిని ఆరాధించండి, అతనికి పువ్వులు, దండలు, ప్రసాద్, జానేయు మొదలైనవి అర్పించండి. దీని తరువాత, ఆవ నూనె యొక్క దీపం వెలిగించి, వరుసగా 41 రోజులు 108 …

कैंची धाम मंदिर देवस्थान

कैंची धाम मंदिर देवस्थानपौराणिक काल से ही भारत वर्ष को आर्यवर्त के नाम से जाना जाता है। संपूर्ण आर्यवर्त में सनातन धर्मियो ने समय-समय पर शास्त्रों और वेदों के प्रमाण दिए जिनसे सांसारिक मनुष्यों का मार्ग दर्शन संभव हो सका। इसी भारतवर्ष की परम पावन भूमि पर समय-समय पर अनेकों दिव्य विभूतियों ने अवतार ग्रहण किया।  समय-समय पर ईश्वर ने संतों के रूप में इस धरती पर अवतार लेकर अपने भक्तों का मार्गदर्शन किया और उनको उचित मार्ग दिखलाया।  नीम करोली बाबा का कैंची धाम यूं तो भारत संतों का देश है फिर भी आज हम जिन संत के बारे में बताने जा रहे हैं वह अपने आप में एक दिव्य विभूति रहे हैं जिनका नाम है परम पूज्य श्री नीम करोली बाबा जी।  कहते हैं संतो की चरण धूलि जहां पड़ जाए वह स्थान अपने आप में स्वयं पवित्र हो जाता है ठीक उसी प्रकार नीम करोली बाबा ने जिस स्थान पर अपने चरण रखे वह स्थान मंदिर बन गए और आज संपूर्ण विश्व में उन स्थानों पर श्री हनुमान जी महाराज का मंदिर विद्यमान हैं जिनमें से सबसे प्रमुख मंदिर जहां नीम करोली बाबा निवास करते थे उत्तराखंड के भोवाली  के निकट श्री कैंची धाम में पड़ता है।  श्री कैंची धा…

नीम करोली बाबा - बृजलाल हम तो भूखे रह गये

नीम करोली बाबा भूखे रह गयेपरिचय :नीम करोली बाबा उत्तराखंड में नैनीताल के निकट भोवाली छेत्र के निकट श्री कैंची धाम में निवास करते थे। बाबा नीब करोरी और बाबा नीम करोली दोनों एक ही दिव्य विभूति के नाम है।  ये दोनों नाम उनके प्यारे भक्तो ने दिए जिनको परमपूज्य श्री नीम करोली बाबा जी ने सहर्ष स्वीकार किया। श्री कैंची धाम का पवित्र आश्रम प्रकृति की गोद में आलोकिक वातावरण और सकारात्मक ऊर्जा के भण्डार के लिए प्रसिद्ध है। देश-विदेश के अनगिनत भक्त प्रतिदिन यहाँ बाबा के दर्शन करने आते थे और आज उनके समाधिस्थ होने के बाद भी भक्तो की उनपर आस्था और विश्वास के चलते निरंतर दर्शनार्थियो की भीड़ मंदिर प्रांगण में लगी रहती है।  कानपुर की घटना :कानपुर के एक बड़े उधोग पति की माता जी के आग्रह करने पर एक दिन बाबा जी ड्राईवर बृजलाल के साथ माता जी की कोठी पर जा पहुंचे। मारवाड़ी उधोगपति के घर सोने चाँदी के पात्रों में तरह तरह के व्यंजन देख कर बाबा जी का वैरागी मन विचलित हो गया।  गृह स्वामिनी के मन में ऐसे पात्रों में भोजन परोसते शायद कुछ दूसरा भाव आ गया हो ( अंहकार का ) की कुछ ही देर में बाबा जी ने एक पात्र में ज़र…

अद्भुत अष्टांग योग | Adbhut Ashtanga Yoga

अद्भुत अष्टांग योग | Adbhut Ashtanga Yoga | Ashtanga Yoga Historyअष्टांग योग के बारें में सनातन धर्म के शास्त्रों और पुराणों में आज से लाखो साल पहले ही विस्तृत जानकारी हमारे ऋषि मुनियों द्वारा प्रदान की जा चुकी है। आज हम सभी किसी न किसी रूप में उन महात्माओ के द्वारा बताये गए सिद्धांतो का अनुसरण करते है। Ashtanga Yoga Definitionआयुर्वेद में बताया गया है कि जीवन में सदाचार को प्राप्त करने का साधन योग मार्ग को छोड़कर दूसरा कोई नहीं है। नियमित अभ्यास और वैराग्य के द्वारा ही योग के संपूर्ण लाभ को प्राप्त किया जा सकता है।  हमारे ऋषि मुनियों ने शरीर को ही ब्रम्हाण्ड का सूक्ष्म मॉडल माना है। इसकी व्यापकता को जानने के लिए शरीर के अंदर मौजूद शक्ति केन्द्रों को जानना ज़रूरी है। इन्हीं शक्ति केन्द्रों को ही ‘’चक्र कहा गया है। अष्टचक्रआयुर्वेद के अनुसार शरीर में आठ चक्र होते हैं। ये हमारे शरीर से संबंधित तो हैं लेकिन आप इन्हें अपनी इन्द्रियों द्वारा महसूस नहीं कर सकते हैं। इन सारे चक्रों से निकलने वाली उर्जा ही शरीर को जीवन शक्ति देती है।  आयुर्वेद में योग, प्राणायाम और साधना की मदद से इन चक्रों को जाग…

Neem Karoli Baba Dwara Kainchi Dham Sthapna | नीम करोली बाबा द्वारा कैंची धाम स्थापना

Neem Karoli Baba Dwara Kainchi Dham Sthapna | नीम करोली बाबा द्वारा कैंची धाम स्थापनाउत्तराखंड की वादियों में बसा श्री कैंची धाम आज पुरे विश्व में जाना और माना जाता है। श्री कैंची धाम अपने अनोखे देवता के लिए विश्व प्रसिद्ध हुवा। जी हां एक ऐसा संत जो दिखने में साधारण होते हुवे भी चमत्कारों से ओत-प्रोत था।  उन दिव्य विभूति का नाम परम पूज्य सदगुरुदेव श्री नीम करोली बाबा था जिन्हे उनके भक्त नीब करोरी बाबा के नाम से भी जानते थे। बाबा को उनके भक्तो ने प्रेमवश महाराज जी के नाम से भी सम्बोधित किया।  नीम करोली बाबा ने उत्तराखंड में श्री कैंची धाम की स्थापना 15 जून 1964 को की थी अतः उनके समाधिस्थ होने के पश्चात भी प्रतिवर्ष 15 जून को विशाल भंडारे और मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें बाबा के दर्शनों के लिए देश विदेश से लाखो भकतो का ताता लगा रहता है।  श्री कैंची धाम भक्तो के विश्वास और आस्था का केंद्र बन चूका है क्योकि नीम करोली बाबा दिखावे और जूठे आडम्बरो से कोसो दूर थे और उनकी कृपा दृष्टि उनके हर एक भक्त पर सामान रूप से पड़ती थी और आज भी पड़  रही है ।   आज भी बाबा के अनेको भक्तो द्वारा किसी न किसी रू…

नीम करोली बाबा ने बताया ध्यान किसको करना चाहिए | Neem karoli baba ne bataya dhyan kisko karna chahiye

नीम करोली बाबा ने बताया ध्यान किसको करना चाहिए | Neem karoli baba ne bataya dhyan kisko karna chahiye
योग और ध्यान को Neem karoli Baba अत्यंत महत्वपूर्ण मानते थे। वे ये कहते थे की योग और ध्यान से मनुष्य खुद को पहचान सकता है और आत्मानंद की अनुभूति कर सकता है। ध्यान को बाबा अवश्य महत्वपूर्ण बताते थे पर जब कोई व्यक्ति उनके पास बैठ कर ध्यान लगाता तो वे तुरंत उसके ध्यान को तोड देते। लोग उनके पाद-पधो को हाथ मे लेकर ध्यान लगाने की चेष्टा करते तो कभी बाबा अपना पैर हटा लेते तो कभी वे कोई प्रशन कर देते। 
बाबा सब की क्षमता को जानते थे। इसी सदर्भ में Baba Neem Karoli एक बार बोले , "" मस्तिषक की सीमा होती है! तुम शरीरस्थ हो ! ये चीजे धीरे धीरे प्राप्त करने की है , ऐसा न करने से पागल भी हो सकते है ! यह सत्य हैै कि एकाग्र मन ही अन्तदृष्टि प्रदान करता है और यही आत्म- दर्शन है ! पर ईश्वर स्मरण और लोगो की सेवा करने वालो को ध्यान और पूजा की आवशकता नही है ! यह सरलतम साधन है !""

बाबा ने अपने सदुपदेशों के माध्यम से स्पस्ट बताने का प्रयास किया की जो प्राणी ईश्वर के नाम का निरंतर स्मरण करता …