अभिमान ही दुखों का कारण है: नीम करोली बाबा से सीखें अहंकार को त्यागने और सुखी रहने का मार्ग
जय महाराज जी! जय हनुमान! क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे जीवन में अशांति और मानसिक तनाव का सबसे बड़ा कारण क्या है? कई बार हमें लगता है कि धन की कमी या रिश्तों की अनबन दुख का कारण है, लेकिन श्री नीम करोली बाबा जी (Neem Karoli Baba) ने इस पर एक बहुत ही सटीक बात कही है— "अभिमान ही दुखों का कारण है।" महाराज जी का यह संदेश हमें उस 'मैं' (अहंकार) से मुक्त होने की प्रेरणा देता है, जो हमें ईश्वर और आंतरिक शांति से दूर ले जाता है। 1. अहंकार: आत्मा का बोझ महाराज जी अक्सर कहते थे कि भगवान के दरबार में केवल वही स्वीकार किया जाता है जो 'शून्य' होकर जाता है। अभिमान वह भारी बोझ है जिसे हम उम्र भर ढोते हैं, और यही बोझ हमें मानसिक अशांति, ईर्ष्या और क्रोध की ओर ले जाता है। अहंकार और पतन: जब व्यक्ति को अपनी शक्ति, धन या ज्ञान का घमंड हो जाता है, तो वह दूसरों को छोटा समझने लगता है। यही से उसके पतन की शुरुआत होती है। सुख में बाधा: अहंकारी व्यक्ति कभी संतुष्ट नहीं होता। उसे हमेशा और अधिक पाने की लालसा रहती है, जो उसे कभी सुख का अनुभव नहीं करने देती। 2. नीम करोली ब...