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Sankat se Mukti pane ke liye Hanuman ji ka Vishesh Mantra

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Vishnu Sahasranamam Stotram With Hindi Lyrics

Vishnu Sahasranamam Stotram Mahima ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः प्रिय भक्तों, विष्णु सहस्रनाम भगवान श्री हरि विष्णु अर्थात भगवान नारायण के 1000 नामों की वह श्रृंखला है जिसे जपने मात्र से मानव के समस्त दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं और भगवान विष्णु की अगाध कृपा प्राप्त होती है। विष्णु सहस्रनाम का जाप करने में कोई ज्यादा नियम विधि नहीं है परंतु मन में श्रद्धा और विश्वास अटूट होना चाहिए। भगवान की पूजा करने का एक विधान है कि आपके पास पूजन की सामग्री हो या ना हो पर मन में अपने इष्ट के प्रति अगाध विश्वास और श्रद्धा अवश्य होनी चाहिए। ठीक उसी प्रकार विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते समय आपके हृदय में भगवान श्री विष्णु अर्थात नारायण के प्रति पूर्ण प्रेम, श्रद्धा, विश्वास और समर्पण भाव का होना अति आवश्यक है। जिस प्रकार की मनोस्थिति में होकर आप विष्णु सहस्रनाम का पाठ करेंगे, उसी मनोस्थिति में भगवान विष्णु आपकी पूजा को स्वीकार करके आपके ऊपर अपनी कृपा प्रदान करेंगे। भगवान विष्णु के सहस्र नामों का पाठ करने की महिमा अगाध है। श्रीहरि भगवान विष्णु के 1000 नामों (Vis...

कैंची धाम का रहस्य: जब नीम करोली बाबा ने सिद्ध आत्माओं को सुनाई हनुमान कथा

श्री कैंची धाम (Shri Kainchi Dham) न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ की भूमि कण-कण में अध्यात्म और चमत्कारों को समेटे हुए है। नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba) के जीवन काल में यहाँ कई ऐसी अलौकिक घटनाएं घटीं, जो आज भी भक्तों को हैरत में डाल देती हैं। ​ऐसा ही एक रहस्यमयी प्रसंग है— कैंची धाम की सिद्ध आत्माएं और बाबा जी की लीला। आइए जानते हैं इस अद्भुत और सत्य घटना के बारे में। ​जब बाबा नीम करोली ने दिया हनुमान कथा का आदेश ​एक बार पूजनीय महाराज जी ने आश्रम के रामायणी श्री शंकर प्रसाद व्यास जी को अपने पास बुलाया। बाबा जी ने पहाड़ियों की तरफ इशारा करते हुए कहा: ​ "व्यास जी! इन पवित्र पर्वतों में कई सिद्ध आत्माएं और दिव्य शक्तियां निवास करती हैं। तुम यहाँ रोज़ नियम से भगवान हनुमान जी की कथा का पाठ किया करो।" ​बाबा की आज्ञा पाकर व्यास जी ने उस निर्जन और शांत स्थान पर कथा कहना शुरू कर दिया। शुरुआती तीन दिनों तक वहाँ कोई विशेष भीड़ नहीं जुटी; बस कुछ स्थानीय महिलाएं ही कथा सुनने आती थीं। ​श्रोताओं की कमी और व्यास जी की चिंता ​तीन दिन बीतने के बाद व...

प्रसाद और भोजन के फर्क पर नीम करोली बाबा के विचार

यदि आप नीम करोली बाबा के उपदेशों के बारे में जानना चाहते हैं, तो उनके विचारों में से एक है प्रसाद और भोजन के फर्क के बारे में। इस पोस्ट में, आप उनके उपदेशों के बारे में जान सकते हैं और उनके विचारों से प्रेरणा ले सकते हैं। भोजन और प्रसाद का अंतर क्या है? नीम करोली बाबा के अनुसार, भोजन और प्रसाद दो अलग-अलग चीजें हैं। भोजन खाने के लिए होता है, जबकि प्रसाद भगवान के लिए चढ़ाया जाता है। भोजन शारीरिक ऊर्जा के लिए होता है, जबकि प्रसाद आत्मिक ऊर्जा के लिए होता है। भोजन खाने से शारीरिक तौर पर हमें फायदा होता है, जबकि प्रसाद खाने से हमारी आत्मा को शांति मिलती है। प्रसाद के लाभ क्या हैं? प्रसाद खाने से हमारी आत्मा को शांति मिलती है और हमारे मन में शुद्धता आती है। इसके अलावा, प्रसाद खाने से हमारी आत्मिक ऊर्जा बढ़ती है और हमारी मनोदशा भी बेहतर होती है। यह हमारे शरीर को भी फायदा पहुंचाता है क्योंकि इसमें शुद्ध और सात्विक आहार होता है जो हमारे शरीर के लिए बहुत अच्छा होता है। भोजन के नियम क्या हैं? नीम करोली बाबा के अनुसार, भोजन के नियम बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सिखाया कि हमें ...

Bhado ki parivartani ekadashi ki Mahatma katha | Bhado Vaman Ekadashi Katha

॥ अथ वामन (परिवर्तिनी ) एकादशी माहात्म्य ॥ धर्मराज युधिष्ठिर बोले कि हे भगवान् ! भादों की शुक्लपक्ष की एकादशी का नाम तथा विधि क्या है। उस एकादशी के व्रत को करने से कौन सा फल मिलता है तथा उसका उपदेश कौन सा है? सो सब कहिए। श्रीकृष्ण भगवान बोले कि हे राजश्रेष्ठ ! अब मैं अनेक पाप नष्ट करने वाली तथा अन्त में स्वर्ग देने वाली भादों की शुक्लपक्ष की वामन नाम की एकादशी की कथा कहता हूँ। इस एकादशी को जयन्ती एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी की कथा के सुनने मात्र से ही समस्त पापों का नाश हो जाता है। इस एकादशी के व्रत का फल वाजपेय यज्ञ के फल से भी अधिक है। इस जयंती एकादशी की कथा से नीच पापियों का उद्धार हो जाता है। यदि कोई धर्म परायण मनुष्य एकादशी के दिन मेरी पूजा करता है तो मैं उसे संसार की पूजा का फल देता हूँ। जो मनुष्य मेरी पूजा करता है उसे मेरे लोक की प्राप्ति होती है। इस में किंचित मात्र भी संदेह नहीं। जो मनुष्य इस एकादशी के दिन श्री वामन भगवान की पूजा करता है वह तीनों देवता अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु, महेश की पूजा करता है। जो मनुष्य इस एकादशी का व्रत करते हैं उन्हें इस संसार में कुछ भी क...

नीम करोली बाबा ने बताया बीमारियों से मुक्ति पाने का मंत्र (Neem Karoli Baba Mantra for Good Health)

Neem Karoli Baba Aur Rog Mukti Vaidik Mantra प्रिय भक्तों आज हम आप सभी को ऐसे मंत्र के बारे में बताएंगे जिसका उच्चारण करके आप सभी रोगों से मुक्ति पा सकते हैं। हम सभी के जीवन में अनेकों अनेक रोग कभी न कभी आ ही जाते हैं जिनकी वजह से हम सभी का जीवन हस्त व्यस्त हो जाता है। परम पूज्य श्री नीम करोली बाबा की कृपा से और हनुमान जी के आशीर्वाद से हम सभी को बाबा जी का सानिध्य प्राप्त हुआ और बाबा जी के सानिध्य में रहकर हम सभी ने राम नाम रूपी मंत्र को जाना जिसके उच्चारण मात्र से हम सभी को प्रभु श्री राम के साथ-साथ हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है। बाबा जी के दिशा निर्देशों के अनुसार हम सभी अपने जीवन की मोह माया से मुक्ति पा सकते हैं। यूं तो जब तक जीवन है तब तक माया से मुक्ति पाना संभव नहीं हो पता परंतु गृहस्थ जीवन में रहकर भी एक सन्यासी का जीवन जीना सहज हो सकता है यदि हम ईश्वर में अपने मन को रमाने का प्रयास करें और अपने कर्म पर ध्यान दे क्योंकि गीता में भी भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि कर्म ही प्रधान है। यदि हम बिना किसी लोभ के, बिना किसी आशा के, बिना ये सोचे कि यह पुण्य है या पाप केवल ...

​श्री हनुमान चालीसा हिंदी अर्थ सहित | COMPLETE Hanuman Chalisa Lyrics in Hindi

सनातन धर्म में हनुमान जी को भगवान शिव का 11 रुद्र अवतार माना जाता है। हनुमान जी की आराधना में हनुमान चालीसा का वैसा ही महत्व है जैसे श्री राम की आराधना में रामायण और रामचरितमानस का है।  भारतवर्ष में जहां कहीं भी हनुमान जी की आराधना की जाती है, वहां हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है परंतु बहुत सारे लोगों को अभी तक हनुमान चालीसा का शाब्दिक अर्थ नहीं पता है। आज हम आपको हनुमान चालीसा का शुद्ध शाब्दिक अर्थ समझायेंगे जिसको जानने के पश्च्यात हनुमान चालीसा पढ़ने पर आप स्वयं को हनुमान जी के अति समीप महसूस करेंगे।  हनुमान चालीसा सम्पूर्ण अर्थ सहित (Lyrics) श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि। अर्थ - गुरु महाराज के चरण कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे। बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार। बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार। अर्थ- हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्...

हनुमान जी की कथा: भगवान हनुमान के प्रति एक भक्ति

हनुमान जी , जिन्हें भगवान हनुमान के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू पौराणिक कथाओं में एक पूजनीय देव हैं। वह अपनी अपार शक्ति, बुद्धि और भगवान राम के प्रति अटूट भक्ति के लिए जाने जाते हैं। इस लेख में, हम हनुमान जी की किंवदंती और उनके वीरतापूर्ण कार्यों के बारे में जानेंगे जिन्होंने उन्हें दुनिया भर के हिंदुओं के बीच एक प्रिय देवता बना दिया है। हनुमान जी का परिचय और हिंदू पौराणिक कथाओं में उनका महत्व हनुमान जी हिंदू पौराणिक कथाओं में एक प्रमुख व्यक्ति हैं और भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति के लिए पूजनीय हैं। उन्हें भगवान शिव का अवतार माना जाता है और वे अपनी अपार शक्ति, बुद्धि और साहस के लिए जाने जाते हैं। हनुमान जी को वानर देवता के रूप में भी जाना जाता है और उन्हें अक्सर वानर के चेहरे और पूंछ के साथ चित्रित किया जाता है। वह भक्ति, शक्ति और वफादारी का प्रतीक हैं, और उनकी किंवदंती ने दुनिया भर में कई भक्तों को प्रेरित किया है। हनुमान जी के जन्म और बचपन की कहानी हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, हनुमान जी का जन्म एक अप्सरा अंजना से हुआ था, जिसे बंदर के रूप में रहने का श्राप...