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Showing posts from September, 2019

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मंगलवार का देवता कौन है? | मंगलवार को कौन सा मंत्र पढ़ना चाहिए?

शास्त्रों के मुताबिक, मंगलवार का दिन भगवान गणेश, भगवान हनुमान, और देवी दुर्गा और काली को समर्पित है। मंगलवार को बजरंगबली का दिन माना जाता है। इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मंगलवार की पूजा मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। हनुमान जी को शक्ति, बल, साहस और संकट मोचन का देवता माना जाता है। माना जाता है कि मंगलवार के दिन अगर सच्चे मन और पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान जी की पूजा की जाए तो व्यक्ति को हर संकट से मुक्ति मिल जाती है। शास्त्रों के मुताबिक, मंगलवार के दिन देवी पूजा के लिए पंचमेवा, मिष्ठान, फल, लाल रंग के पुष्प और माला, कलावा, दिया, बाती, रोली, सिंदूर, पानी वाला नारियल, अक्षत, लाल कपड़ा, पूजा वाली सुपारी, लौंग, पान के पत्ते, गाय का घी, कलश, आम का पत्ता, कमल गट्टा, समिधा, लाल चंदन, जौ, तिल, सोलह श्रृंगार का सामान आदि रखना चाहिए।  मंगलवार को व्रत रखने से कुंडली में मंगल दोष से मुक्ति भी मिल सकती है। मंगलवार के दिन में क्या खास है? मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, मंगलवार के दिन ही बजरं

Neem Karoli Baba ka Farman - Shri Kainchi Dham

नीम करोली बाबा का फरमान   - श्री कैंची धाम  यू तो नीम करोली बाबा के चमत्कारों के अनेकों किस्से प्रचलित है और विश्व विख्यात है फिर चाहे एप्पल कम्पनी को जन्म देने की बात हो या फेसबुक कम्पनी को डूबने से बचाने का किस्सा हो। आज हम एक और सत्य घटना आप सबके सामने लेकर आए है जिसमें नीम करोली बाबा ने अपने एक प्रशासनिक भक्त का कल्याण किया।ये बात उस समय की  है जब श्री नीम करोली बाबा ने एक पुलिस सब इंस्पेक्टर को पुलिस कप्तान बनने का लिखित फरमान जारी कर दिया था।  पुलिस सब इंस्पेक्टर राम नारायण सिन्हा धीरे धीरे बाबा नीम करोली   के भक्त हो चले थे। एक बार जब वह  बाबाजी से मिलने गये तो बाबाजी ने उनसे कागज व  पेन ले आने को कहा।  कागज पेन लेकर महाराज जी   ने उस पर राम राम लिखना प्रारम्भ कर दिया, जब पूरा कागज भर गया तो अन्त में बाबाजी ने लिख दिया कि तू पुलिस कप्तान बनेगा तथा अपना अंगूठा लगाकर नीचे लिख दिया बाबा नीम करोली साथ ही यह कागज श्री सिन्हा के हाथ में थमा दिया। अंग्रेजी शासनकाल में कैसे एक हिंदुस्तानी दरोगा आई.पी.एस. अफसर बन जायेगा इस बात पर रत्ती भर यकीन न करते हुये भी उन्होने वह कागज अपन

नीम करोली बाबा गायब हो गए - श्री कैंची धाम

नीम करोली बाबा गायब हो गए - श्री कैंची धाम । Neem karoli baba gayab ho gaye - Shri Kainchi Dham एक बार कांग्रेस के कुछ पचास साठ कार्यकर्ता महाराज जी के दर्शन के लिए आ रहे थे । उस वक्त महाराज जी हनुमानगढ़ में थे। महाराज जी ने दूर से देख लिया कि वे लोग आश्रम की तरफ आ रहे हैं। उन्होंने एक भारतीय संन्यासी रामदास को साथ लिया और पहाड़ी से नीचे उतरकर एक देवी मंदिर में चले गये। इधर पार्टी के लोग जब आश्रम में पहुंचे तो उन्होंने महाराज जी के बारे में पता किया। वहां लोगों ने बता दिया कि वे पहाड़ी से नीचे की तरफ गये हैं।वे  लोग नीचे उतरकर उसी मंदिर के पास पहुंच गये जहां महाराज जी रामदास के साथ मंदिर के बाहर ही बैठे हुए थे।वे लोग साठ फीट दूर खड़े होकर मंदिर के चारों तरफ देखने लगे लेकिन उन लोगों को न महाराज जी दिखाई दिये और न ही रामदास। उन्हीं के सामने खड़े होकर वे लोग नीम करौली बाबा के बारे में आपस में पूछताछ कर रहे थे लेकिन महाराज जी उनको दिखाई नहीं दे रहे थे अर्थात नीम करोली बाबा गायब हो गए परन्तु केवल उनलोगो की दृस्टि में।  तभी रामदास को बड़ी जोर की खांसी आने को हुई. वे हशीश पीते थे और

श्रद्धा और विश्वास - श्री कैंची धाम

        श्रद्धा और विश्वास - श्री कैंची धाम   श्रद्धा और विश्वास का केंद्र है श्री कैंची धाम । सन  1974 में स्टीव जोब्स श्री ब्रह्मचारी बाबा जी के साथ श्री कैंची धाम आश्रम मे जो की  नैनीताल से 38 किमी दूर भवाली के रास्ते में पड़ता है आ पहुंचे । बाबा नीम करोली ने इस स्थान पर सन 1964 में आश्रम बनाया था। इन्‍हीं बाबा नीब करौरी को हनुमान जी का धरती पर दूसरा रूप कहा जाता है। वैसे बाबा का असली नाम श्री लक्ष्मी नारायण शर्मा था। महाराज जी द्वारा स्थापित ये आश्रम अपनी स्‍थापना के बाद से अब तक भव्य मंदिर का रूप ले चूका है जहाँ  मां दुर्गा, वैष्णो देवी, हनुमान जी और राधा कृष्ण की मूर्तियां विराजमान हैं। मंदिर में आज भी बाबा की निजी वस्तुएं, गद्दी, कंबल, छड़ी आज भी वैसे ही सुरक्षित हैं जैसी उनके जीवन में थीं। पर्यटकों के लिए आज वही मुख्य दर्शन का केंद्र हैं। Image Subject To Be Copyright दिव्य शक्तियों के स्वामी माने जाते हैं कहते हैं कि इस मंदिर के संस्‍थापक बाबा दिव्य शक्तियों के स्वामी थे, पर वे आडंबरों से दूर रहते थे। उनके माथे पर न त्रिपुण्ड लगा होता था न गले में जनेऊ और कंठमाला। उ

नीम करोली बाबा का प्रसाद - श्री कैंची धाम

नीम करोली बाबा का प्रसाद - श्री कैंची धाम नीम करोली बाबा कहो या नीब करोरी बाबा हर शब्द में केवल एक ही अर्थ निकलता है कि बाबा हम आपके है और आप हमारे है । अपने हर भक्त और उसके परिवार के पालन पोषण का बाबा सदैव ध्यान रखते है । एक बार की विचित्र घटना है लखनऊ में महाराजजी ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों को साथ लिया और सबसे गरीब मुहल्ले की तरफ सड़क नाली पानी की हालत देखने पहुंच गये। वहां पहुंचकर उन्होंने एक मुसलमान को अपने पास बुलाया और बोले- मुझे भूख लगी है। मुसलमान ने कहा, लेकिन महाराजजी मेरे पास खिलाने के लिए कुछ भी नहीं है। महाराजजी ने कहा, "तूने घर के छप्पर में दो रोटी नहीं छिपा रखी है दुष्ट?"उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि महाराजजी को कैसे पता चला? वह छप्पर में से दो रोटी निकाल लाया। एक रोटी महाराजजी ने खाई और दूसरी रोटी अधिकारियों को दे दी जिसमें हिन्दू ब्राह्मण भी थे। महाराजजी ने कहा, " प्रसाद लो ।" (रामदास, मिराकल आफ लव, दूसरा संस्करण, 1995, पेज- 43-45) इस प्रकार नीम करोली बाबा ने अपने भक्तो में प्रसाद का वितरण किया और सबकी मनोकामनाएं पूर्ण की । जय श्री कैंची धा