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Showing posts from July, 2019

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दिव्य ज्ञान का अनावरण: Exploring the Secrets of Vedas and Upanishads

प्राचीन ग्रंथों में ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान की कुंजी छिपी है। इस आकर्षक लेख में, हम वेदों और उपनिषदों की गहराई में उतरते हैं, उन गहन शिक्षाओं और अंतर्दृष्टि को उजागर करते हैं जिन्होंने सदियों से मानवता का मार्गदर्शन किया है। वेद, अस्तित्व में सबसे पुराने पवित्र ग्रंथ माने जाते हैं, जो दिव्य रहस्यों की गहन खोज प्रदान करते हैं। ब्रह्मांड की प्रकृति के बारे में गहन ज्ञान प्रकट करते हुए, वेद आध्यात्मिक साधकों को परम सत्य को उजागर करने का मार्ग प्रदान करते हैं। वेदों की शिक्षाओं का विस्तार करने वाले दार्शनिक और रहस्यमय ग्रंथों, उपनिषदों के साथ, यह लेख व्यक्तिगत आत्मा (आत्मा) और सार्वभौमिक चेतना (ब्रह्म) के बीच गहन संबंध पर प्रकाश डालता है। इन प्रतिष्ठित ग्रंथों में पाई जाने वाली प्रमुख अवधारणाओं और ज्ञान की सावधानीपूर्वक जांच के माध्यम से, हम उस कालातीत ज्ञान को उजागर करते हैं जो पीढ़ियों से आगे निकल गया है। इस ज्ञानवर्धक यात्रा में हमारे साथ शामिल हों क्योंकि हम वेदों और उपनिषदों के रहस्यों का पता लगाते हैं, सदियों पुराने ज्ञान को उजागर करते हैं जो हमारे आधुनिक जीवन में प्रास

हनुमानजी का चित्र घर में कहाँ लगायें? | Where to put Hanumanji's picture in the house?

         हनुमानजी का चित्र घर में कहाँ लगायें?  श्रीराम भक्त हनुमान साक्षात एवं जाग्रत देव हैं। हनुमानजी की भक्ति जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी। कठिन इसलिए की इसमें व्यक्ति को उत्तम चरित्र और मंदिर में पवित्रता रखना जरूरी है अन्यथा इसके दुष्परिणाम भुगतने होते हैं | हनुमानजी की भक्ति से चमत्कारिक रूप से संकट खत्म होकर भक्त को शांति और सुख प्राप्त होता है। विद्वान लोग कहते हैं कि जिसने एक बार हनुमानजी की भक्ति का रस चख लिया वह फिर जिंदगी में अपनी बाजी कभी हारता नहीं। जो उसे हार नजर आती है वह अंत में जीत में बदल जाती है। ऐसे भक्त का कोई शत्रु नहीं होता।  आपने हनुमानजी के बहुत से चित्र देखे होंगे। जैसे- पहाड़ उठाए हनुमानजी, उड़ते हुए हनुमानजी, पंचमुखी हनुमानजी, रामभक्ति में रत हनुमानजी, छाती चीरते हुए, रावण की सभा में अपनी पूंछ के आसन पर बैठे हनुमानजी, लंका दहन करते हनुमान, सीता वाटिका में अंगुठी देते हनुमानजी, गदा से राक्षसों को मारते हनुमानजी, विशालरूप दिखाते हुए हनुमानजी, आशीर्वाद देते हनुमानजी। राम और लक्षमण को कंधे पर उठाते हुए हनुमानजी, रामायण पढ़ते हनुमानजी, सूर्य को निगल

Neem Karoli Guru Purnima | नीम करोली गुरु पूर्णिमा |

नीम करोली गुरु पूर्णिमा  - कैंची धाम   सर्व प्रथम आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभ कामनाएं।  परम गुरुदेव श्री नीम करोली बाबा जी का आशीर्वाद आप सभी को निरंतर प्राप्त होता रहे बस इसी कामना के साथ हम सब आज के इस पावन पर्व को मनाएंगे।  सनातन धर्म में गुरु का महत्त्व तो भगवान् से भी अधिक बताया गया है शायद इसी लिए संत कबीर दस जी ने भी लिखा था की "गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागू पाय , बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताये। " केवल गुरु ही वो साधन है जो हमें भगवान् के दर्शन करवा सकता है पर गुरु योग्य होना चाहिए और भक्त में भक्ति प्रबल होनी चाहिए।  हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है| गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा की जाती है| भारत वर्ष में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है|  नीम करोली बाबा ने अपने सभी भक्तो को सम्पूर्ण जीवनकाल में असीमित प्रेम और करुणा दी और आज भी बाबा के समाधिस्त होने के बाद भी बाबा के भक्तो और उनके शिष्यों पर परम गुरुदेव नीम करोली बाबा की कृपा का वरदहस्त निरंतर बना हुवा है।  गुरु पूर्णिमा का महत्‍व

You will not go by this bus - Kainchi Dham | तू इस बस से नहीं जायेगा - कैंची धाम

प्रिय भक्तों हम सब महाराज जी के शिष्य, उनके पुत्र, उनके बच्चे किसी न  किसी रूप में परम पूज्य महाराज श्री नीम करोली बाबा जी की आराधना में लगे हुए हैं। हम सभी जानते हैं कि महाराज जी ने लोक हितार्थ अवतार धारण किया और अपने अवतार कार्य मेंउन्होंने संपूर्ण मानव जाति को जीने की एक विशिष्ट कला सिखाई और सबको आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया।  हम सब उनके ऋणी हैं क्योंकि उनके जैसा मार्गदर्शन, गुरु और आध्यात्मिक का ज्ञाता दूसरा मिलना कतई संभव नहीं है। उन्होंने अपने अनुयायियों, अपने भक्तों और जो कोई भी उनकी शरण में आया सभी को अपनी संतान की भांति निस्वार्थ भाव से प्रेम किया और अपनी शरण में आए हुए प्रत्येक भक्त का मार्गदर्शन किया, उनको संकटों से बचाया और भिन्न-भिन्न प्रकार सेआध्यात्मिक मार्ग के चमत्कारों को दिखाते हुए राम नाम की महिमा का प्रचार और प्रसार किया। तुम इस बस से नहीं जाओगे आज की दिव्य कथा भी एक ऐसी ही घटना से प्रेरित होकर लिखी जा रही है जिसमें आप जानेंगे कि त्रिकालदर्शी श्री नीम करोली बाबा जी ने किस प्रकार अपने भक्त की यात्रा के संबंध में उसको प्रेरित किया

Guru Bhakti NeemKaroli Baba - Shri Kainchi Dham

                                   गुरु भक्ति Guru Bhakti NeemKaroli Baba - Shri Kainchi Dham भक्त रामदास की कहानी उन्ही की ज़ुबानी  एक दिन मैं महाराज जी से कुछ दूरी पर उनके सामने ही बैठा हुआ था। बहुत सारे भक्त उनके आसपास बैठे हुए थे। बात हो रही थी। हंसी मजाक चल रहा था। कुछ उनके पैरों की मालिश कर रहे थे। लोग उन्हें सेव और फूल दे रहे थे। वे उन चीजों को प्रसाद रूप में लोगों में वितरित कर रहे थे। सब तरफ प्रेम और करुणा बरस रही थी। लेकिन मैदान में कुछ दूरी पर मैं अलग ही अवस्था में बैठा हुआ था। मैं सोच रहा था कि सब ठीक है लेकिन यह सब तो एक मूर्तरूप से जुड़ा प्रेम है। मैंने यह कर लिया अब मुझे इसके परे ज ाना है। वे कुछ खास नहीं हैं हालांकि वे सबकुछ हैं। मैं दुनिया में जहां कहीं भी हूं, उनके चरणों में हूं। मैं उनके साथ जिस अवस्था में जुड़ा हूं उसके लिए शरीर की मर्यादा का होना जरूरी नहीं है। जागृत अवस्था में हम एक हैं। तभी मैंने देखा कि महाराज जी ( नीम करोली बाबा ), एक बुजुर्ग भक्त के कान में कुछ कह रहे हैं और वह बुजुर्ग भक्त भागकर मेरे पास आया और मेरे पैर छूकर खड़ा हो गया। मैंने पूछ