Skip to main content

Posts

Showing posts from March, 2020

Most Popular Post

दिव्य ज्ञान का अनावरण: Exploring the Secrets of Vedas and Upanishads

प्राचीन ग्रंथों में ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान की कुंजी छिपी है। इस आकर्षक लेख में, हम वेदों और उपनिषदों की गहराई में उतरते हैं, उन गहन शिक्षाओं और अंतर्दृष्टि को उजागर करते हैं जिन्होंने सदियों से मानवता का मार्गदर्शन किया है। वेद, अस्तित्व में सबसे पुराने पवित्र ग्रंथ माने जाते हैं, जो दिव्य रहस्यों की गहन खोज प्रदान करते हैं। ब्रह्मांड की प्रकृति के बारे में गहन ज्ञान प्रकट करते हुए, वेद आध्यात्मिक साधकों को परम सत्य को उजागर करने का मार्ग प्रदान करते हैं। वेदों की शिक्षाओं का विस्तार करने वाले दार्शनिक और रहस्यमय ग्रंथों, उपनिषदों के साथ, यह लेख व्यक्तिगत आत्मा (आत्मा) और सार्वभौमिक चेतना (ब्रह्म) के बीच गहन संबंध पर प्रकाश डालता है। इन प्रतिष्ठित ग्रंथों में पाई जाने वाली प्रमुख अवधारणाओं और ज्ञान की सावधानीपूर्वक जांच के माध्यम से, हम उस कालातीत ज्ञान को उजागर करते हैं जो पीढ़ियों से आगे निकल गया है। इस ज्ञानवर्धक यात्रा में हमारे साथ शामिल हों क्योंकि हम वेदों और उपनिषदों के रहस्यों का पता लगाते हैं, सदियों पुराने ज्ञान को उजागर करते हैं जो हमारे आधुनिक जीवन में प्रास

नीम करोली बाबा द्वारा व्यापार रक्षा | Neem Karoli Baba Dwara Vyapar Raksha

नीम करोली बाबा को आज सारा विश्व एक गुरु, भगवान् और दिव्य संत के रूप में पूजता है। बाबा के दर्शनों को आए हुए भक्तों के व्याख्यानों से पता चलता है कि प्रत्येक भक्त की बाबा पर पूर्ण आस्था रहती थी जिसके परिणाम स्वरुप बाबा अपने भक्तों को उनके संकटो और कष्टों से मुक्ति दिलाते जा रहे थे। बाबा को अपने प्रत्येक भक्त के परिवार और उसके व्यापार की सदैव चिंता रहती थी। चाहे उनका कोई भक्त कोई व्यापारी हो या कोई छोटी-मोटी नौकरी करने वाला हो या कोई बड़ा अधिकारी ही क्यों न हो , बाबा बिना किसी भेदभाव के सब पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए हुए थे।  नीम करोली बाबा द्वारा व्यापार रक्षा आज के इस प्रसंग से हम आपको परम पूज्य श्री नीम करोली बाबा के बारे में वो तथ्य बताएँगे जिनको जानकार आप सभी को बड़ा विस्मय होगा की कैसे महाराज जी ने अपने प्रिय भक्त के व्यापार की रक्षा की।    रामगढ़ (नैनीताल) के सेब के ठेकेदार श्री शिवसिंह अपना सेब का ठेका करने के पूर्व महाराजजी के दर्शन के हेतु इस विचार से आये कि दर्शनों के बाद ही कार्य प्रारम्भ करेंगे। लेकिन महाराज जी ने उनको अपने पास रोक लिया। उन्होंने सोचा कि अगले द