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Showing posts from 2019

प्राण वापस आ गये नीम करोली बाबा | Pran wapas aa gaye neem karoli baba

प्राण वापस आ गये नीम करोली बाबा| Pran wapas aa gaye neem karoli baba नीम करोली बाबा के जीवन से सम्बंधित अनेक चमत्कारिक घटनाओ में से एक घटना का विवरण यहाँ दिया जा रहा है। बाबा के भक्तो ने बाबा की कृपा को खुद अनुभव किया। ये घटना करीब 4 दशक पुरानी है अर्थात करीब 40 वर्ष पूर्व मेरी पत्नी बहुत बीमार हो गयी। बचने की कोई उम्मीद नही थी। मेरे पास एक ही रास्ता था , बाबा का निरन्तर स्मरण। जब पता चला बाबा जी बरेली डाक्टर भण्डारी के घर आये है तो वहाँ भागा पर बाबा वहाँ न मिले। आठ बजे रात पेड़ के नीचे बैठा बाबा को याद करता रहा, तब एक व्यक्ति से पता चला कि बाबा जी कमिश्नर लाल साहेब के घर पर हैं। मै वहाँ पहँचा परन्तु चपरासी ने भीतर नही जाने दिया। मैं बाहर ही महाराजजी को दीनता से अंतरमन में पुकारता रहा और तभी नीम करोली बाबा जी बाहर निकल आये मेरी आर्त पुकार सुनकर और कहा, "रिक्शा ला तेरे घर चलते है!"
लाल साहब की गाडी पर नीम करोली बाबा नही बैठे। रिक्शे से हम घर आ गये। बाबा सीधे मेरी पत्नी के कमरे में पहुंचे और उनके पलंग के पास ही कुर्सी पर बैठ गये। तभी उन्होने अपने चरण उठाकर पलंग पर रख दिये। पत्नी…

कम्बल वाले बाबा नीम करोली बाबा | Kambal wale baba Neem Karoli Baba

कम्बल वाले बाबा नीम करोली बाबा  | Kambal wale baba Neem Karoli Baba यूं तो बाबा को उनके भक्तो ने अनेकों नाम दिए पर उं नामो में नीम करोली नाम सबसे अधिक प्रसिद्ध हुआ। बाबा को लगभग उनके सभी विदेशी भक्त नीम करोली बाबा के नाम से जानते थे। कुछ स्थानो में नीम करोली बाबा को कम्बल वाले बाबा के नाम से भी जाना जाता था । कम्बल वाले बाबा का चमत्कारनीम करोली बाबा की कृपा का अंत नहीं था । भक्तो की आस्था का आदर करते हुवे वो कभी भी अपने कम्बल से किसी वस्तु को उत्पन्न कर देते तो कभी किसी रोगी को अपना कम्बल उढा कर उसके रोग को दूर कर देते थे। जब नन्दलाल जी घी के पैसे लेने आये तो बाबा ने कम्बल के अन्दर हाथ डालकर 1100 रुपये  निकाल कर उन्हें दिये । डा. भोंसले की क्षुधा पूर्ति के लिये कम्बल के अन्दर से भोजन की थाली प्रकट कर दी । एक बार कलाकन्द कम्बल से निकाल कर बाबा ने केहर सिंह जी को खिलाया और उनका ज्वर शांत हो गया , काली कम्बली वाले बाबा बस अपने कम्बल से ही लोगों का भला करते रहते । आज भी बाबा के समाधिस्थ होने के बाद भी महाराजजी की कृपा किसी ना किसी रूप में उनके भक्तो द्वारा अनुभव की जा रही है। जय श्री नीम …

लंदन में नीम करोली बाबा के दर्शन | London mein neem karoli baba ke darshan

लंदन में नीम करोली बाबा के दर्शन | London mein neem karoli baba ke darshan ये अद्भुत घटना लंदन में घटे एक चमत्कार की है जिसने उस विदेशी भक्त के ह्रदय में भक्ति का संचार कर दिया। हीथर थॉम्पसन (ब्रिटेन) से बताते है की एक दिन मैं डबल डेकर बस से लंदन में यात्रा कर रहा था।  मैं प्रवेश द्वार के पास ही बैठा हुआ था। बस का कंडक्टर ऊपरी डेक पर था। बस लगभग पूरी खाली थी।  इतने में बस एक जगह रुकी और एक भिखारी बस में सवार हुआ।  उसने बेहद फटे हुवे कपडे पहन रखे थे और उसके हाथ में एक नीला और एक लाल कंबल था।  वह मेरे सामने आकर खड़ा हो गया और बहुत ही अच्छी मुस्कुराहट से मेरी तरफ देखने लगा।  मानों वह मेरी बगल वाली सीट पर बैठना चाहता था।  मैं एक तरफ खिसक गया और वह आदमी मेरी बगल में बैठ गया। 
मैं अपना मुंह घुमाकर खिड़की की तरफ देखने लगा।  खिड़की की तरफ देखते हुए मुझे उस बुजुर्ग आदमी के बारे में सोचते हुए उसकी मोहक मुस्कान याद आ रही थी। अचानक मेरे मन में महाराजजी अर्थात नीम करोली बाबा के बारे में विचार आने लगा। उनके बारे मैंने सुन रखा था कि वे भी एक बुजुर्ग आदमी हैं जो कंबल रखते हैं।  महाराजजी की याद आते ही म…

हनुमान वडवानल स्रोत महिमा - श्री कैंची धाम | Hanuman Vadvanal Stotra Mahima - Shri Kainchi Dham

हनुमान वडवानल स्रोत महिमा - श्री कैंची धाम | Hanuman Vadvanal Stotra Mahima - Shri Kainchi Dham  श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र की रचना त्रेतायुग में लंका अधिपति रावण के छोटे भाई विभीषण जी ने की थी। त्रेतायुग से आज तक ये मंत्र अपनी सिद्धता का प्रमाण पग-पग पे देता आ रहा है।  श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र के जाप से बड़ी से बड़ी समस्या भी टल जाती है।श्री हनुमान वडवानल स्रोत का प्रयोग अत्यधिक बड़ी समस्या होने पर ही किया जाता है। इसके जाप से बड़ी से बड़ी समस्या भी टल जाती है और सब संकट नष्ट होकर सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।  श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र के प्रयोग से शत्रुओं द्वारा किए गए पीड़ा कारक कृत्य अभिचार, तंत्र-मंत्र, बंधन, मारण प्रयोग आदि शांत होते हैं और समस्त प्रकार की बाधाएं समाप्त होती हैं।
पाठ करने की विधिशनिवार के दिन शुभ मुहूर्त में इस प्रयोग को आरंभ करें। सुबह स्नान-ध्यान आदि से निवृत्त होकर हनुमानजी की पूजा करें, उन्हें फूल-माला, प्रसाद, जनेऊ आदि अर्पित करें। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर लगातार 41 दिनों तक 108 बार पाठ करें। अंत में भगवान को प्रसाद चढ़ाएं तथा अपनी मनोकामना पूर्ण…

यही सत्संग है - नीम करोली बाबा | Yahi Satsang Hai - Neem Karoli Baba

यही सत्संग है - नीम करोली बाबा | Yahi Satsang Hai - Neem Karoli Baba
कलयुग में राम नाम की धुन और हनुमत कृपा को पाने का सच्चा धाम Shri Kainchi Dhamश्री कैंची धाम (उत्तराखंड ) में पुरे विश्व के भक्तो के लिए आस्था का केंद्र बना हुवा है। श्री नीम करोली बाबा ने कैंची आश्रम में अपने भक्तो को सरल भक्ति का मार्ग प्रशस्त किया और उनका मार्दर्शन किया। 

एक बार  कैंची आश्रम मे नीम करोली बाबा से किसी ने पूछा बाबा जी आपका कोई सत्संग नहीं होता । बाबा बोले ," यहाँ यही सत्संग है , आओ, खाओ और जाओ ।" बाबा जी ने कभी किसी पर उपदेश , आदेश , सत्संग जैसा कुछ नहीं थोपा । उनके द्वारा भक्तों को किसी नियम में नहीं बाँधा जाता था । बस भोलेपन से उनकी भक्ति करो । साधना को वे आम आदमी के लिये बहूत कठिन बताते थे । कहते थे पागल हो जाओगे । बस राम राम करते रहो। यही भक्ति कर लो । झूठ झूठ तो बोलो राम । एक दिन सच्चा राम निकल जायेगा । उसी क्षण राम मिल जायेंगे । आडंबरो , प्रपंचो से हमेशा सबको बचाते थे बाबा । बस भक्ति मार्ग को ईश्वर प्राप्ति का साधन बताते थे । भक्ति से उनका तात्पर्य था राम नाम , चाहे वे किसी रूप मे हो -

नीम करोली बाबा की अनुकम्पा | Neem Karoli Baba Ki Anukampa

नीम करोली बाबा की अनुकम्पा | Neem Karoli Baba Ki Anukampa श्रीमती गिरजा देवी, रानी भद्री बाबा के प्रति अपना आभार प्रकट करते हुए कहती हैं कि श्रीचरणों की महान अनुकम्पा मेरे ऊपर हमेशा बनी रही और मुझे उनके दर्शन सुलभ होते रहे। जब राजा भद्री कुलपति होकर पन्तनगर विश्वविद्यालय में आये तो मैं भी उनके साथ थी। कुछ दिनों बाद मेरी माँ की तबीयत बहुत खराब हो गई। इससे मैं अत्यंत चिन्तित हो उठी और उस परेशानी में रोने लगी। उसी समय नीम करोली बाबा ने मुझे परेशानी से मुक्त किया और बोले, "रो मत, तेरी माँ ठीक हो जायेगी।"
इसी प्रकार सन् 1964 में मेरी लड़की अलका की शादी हो रही थी। उस समय भी मैं बड़ी परेशानी में थी, तभी आराध्यदेव श्री महाराज जी बिना किसी पूर्व सूचना के लखनऊ मेरी कोठी में पहुँच गये और लड़की को आशीर्वाद देकर चले गए। मेरी समस्त परेशानियां स्वतः गायब हो गई और विवाह कार्य बहुत सुख और शान्ति से पूर्ण हुआ। श्री बाबा नीम करौली जी महाराज करूणा के सागर और कृपा की मूर्ति है। बाबा अपने भक्तो पर अपनी स्नेहपुर्नत दृष्टि सदैव बनाए रखते है। नीम करोली बाबा तो त्रिकालदर्शी है जो आज भी समाधिस्थ होने के बाद…

दवा पिला दे - श्री कैंची धाम | Dawa pila de - Shri Kainchi Dham

दवा पिला दे - श्री कैंची धाम | Dawa pila de - Shri Kainchi Dham अल्मोड़ा में एक दिन दिवाकर पंत बहुत बुरी तरह बीमार हो गये। आधी रात होते-होते उनकी हालत बहुत नाजुक हो गयी। पहाड़ में इतनी रात किसी डॉक्टर को बुलाना भी संभव नहीं था। सब सुबह होने का इंतजार कर रहे थे। उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उनकी पत्नी रोते-रोते बदहवास होकर गिर पड़ीं। सभी चिंतित हो उठे।
तभी उन्होंने महसूस किया जैसे महाराज जी उनका कंधा पकड़कर हिला रहे हैं और एक दवा की तरफ इशारा करते हुए कह रहे हैं कि, "वो दवा पिला दे ठीक हो जाएगा।" उन्हें यह सोचने का भी होश नहीं था कि, अचानक बाबाजी कब आ गये ? कमरे में उनके अलावा किसी और ने बाबाजी को देखा भी नहीं। वे उठीं और बाबाजी ने जिस दवा की तरफ इशारा किया था वह दवा पिला दी। दवा देते ही दिवाकर पंत के व्यवहार में अजीब सा बदलाव आ गया। वे हिंसक हो गये और अनाप-शनाप बकने लगे। ऐसे लग रहा था जैसे उनके दिमाग का संतुलन बिगड़ गया है। सब उनकी पत्नी के व्यवहार को कोस रहे थे कि बिना जाने समझे उसने कौन सी दवा दे दी। खुद उनकी पत्नी को भी पता नहीं था कि उन्होंने कौन सी दवा दे दी है। उन्…

मेरे वैध नीम करोली बाबा- श्री कैंची धाम | Mere vaidya neem karoli baba - Shri Kainchi Dham

मेरे वैध नीम करोली बाबा- श्री कैंची धाम | Mere vaidya neem karoli baba - Shri Kainchi Dham पूरन-दा की पत्नी को लक़वे का अटैक आ गया । ठोड़ी टेडी हो गयी । बायीं आँख खुली की खूली रह गयी । चेहरा विकृत हो चला , होंठ एक ओर भिंच गये । मैं घबरा गया कि क्या करूँ , आर्थिक स्थिति भी सही नहीं थी । महाराज को स्मरण करने के सिवा मेरे पास कोई चारा नहीं था । दशा ख़राब होती गयी। आंख की पूतली में सफ़ेदी आ गयी । डाक्टरों ने कह दिया कि लाईलाज बिमारी है । रात को निराश लेटे हम महाराजजी का स्मरण कर रहे थे । न जाने कब हम गहरी नींद में चले गए।
    पर चार बजे सुबह पत्नी बोल उठी ," अरे महाराजजी के नहाने के लिये गरम पानी करना है ।" ( हम दोनों रात भर स्वप्न में बाबा के साथ थे ) आवाज़ सुनकर जागे तो देखा कि प्रभु तो कहीं नहीं है । पर देखा कि पत्नी कि आँख झपकनी शुरू हो गयी ।ठोड़ी धीरे धीरे अपने स्थान पर आ गई । अब एक ही चीज़ रह गयी पूतली में सफ़ेदी तथा होटो का टेढापन । डाक्टर को विश्वास नहीं हूआ । मैं बोला -" ये तो बस उनकी कृपा का फल है ।" मैंने पुतली की सफ़ेदी हेतू दवाई माँगी तो उसने कहा कि काला टैट…

Neem Karoli Baba Aur Bhakt Ki Pukar - Shri Kainchi Dham

Neem Karoli Baba Aur Bhakt Ki Pukar - Shri Kainchi Dham महाराज जी  हम आपकी शरण हैं हमारी रक्षा करें- श्री ओंकार सिंह जी एस. एस.पी और श्री किशनचन्द्र कानपुर के कलेक्टर थे। कानपुर में गंगा जी में भीषण बाढ़ आई हुई थी ।  दोनों अफ़सर अपने मातहतो के साथ नाव में बैठकर मुआइना करने निकल पड़े तभी बीच धार में जा कर पता चला कि नाव में छेद हो गया और उसमे पानी भरना शुरू हो गया । सब घबरा गये । मृत्यु निश्चित रूप से सामने आ गयी थी । तभी ओंकार सिंह जी पागलों की तरह चिल्ला उठे ," बचाओ महाराज जी ।" 
तभी एक बहुत बड़ा तने वाला , जड़ वाला पेड़ उनके निकट आ गया । आनन फानन दोनों अफ़सर और बाक़ी कर्मचारी कूदकर पेड़ की शाखाओं को पकड़ते हुए पेड़ पर चढ़ गये । देखते देखते नाव पानी में डूब गयी । ऊँची लहरों से और तेज़ हवा से अब पेड़ कभी उन्नाव की तरफ़ जाये तो कभी कानपुर की तरफ । लेकिन बाबा की कृपा से तेज़ हवा और ऊँची लहरों से भी पेड़ न डगमगाया न करवट ली और न ही उलटा ।  ओंकार सिंह जी बराबर बाबा को याद करते रहे । बाबा की कृपा से कुछ ही देर में पेड़ कानपुर के किनारे में बालू पर आकर अटक सा गया । सब के सब किनारे पर कूद…

नीब करोरी और नीम करोली में अंतर | NEEB KARORI AUR NEEM KAROLI MEIN ANTAR - Shri Kainchi Dham

नीब करोरी और नीम करोली में अंतर |NEEB KARORI AUR NEEM KAROLI MEIN ANTARश्री कैंची धाम के भगवान् के रूप में श्री हनुमान जी महाराज और श्री नीम करोली बाबा जी को आज सारा संसार पूज्य है । यूं तो महाराज जी के भक्तो ने उनको अनेकों नाम दिए पर जिस नाम से बाबा विश्व विख्यात हुवे वो नाम था नीब करोरी और नीम करोली

बाबा जी ने लक्ष्मी नारायण के रूप में जन्म लिया था ज। वे सुदूर सत्य कि खोज में निकले तब लोग उन्हें लक्ष्मण दास के नाम से जानते थे । बाबा जी कुछ समय के लिए राजस्थान मे किसी स्थान पर रहे थे जहाँ पर तिकोनियाँ बाबा जी कहलाये। बावानियाँ में पहुचने पर तलैया बाबा कहलाये । यहां से वृंदावन आने पर चमत्कारी बाबा कहलाये। उसके बाद नीब करोरी ग्राम में आने पर लक्ष्मण दास बाबा जी कहलाये।जब उत्तराखंड मे बाबा जी पहुंचे तब महाराज कहलाये, बाबा जी ने नीब करोरी ग्राम का नाम हमेशा अपने से जोड़ कर रखा इसी लिए बाबा जी स्वयं नीब  करोरी बाले बाबा कहलाये। जिसमें बहुत ज्यादा भ्रम कि स्थिति आगई। नीब करोरी ग्राम को अंग्रेजी में NEEB KARORI लिखा जाता है, जबकि पहले इसे NEEB को NIB  और KARORI को  KARAURI लिख दिया जाता था …

आई मौत टल गई - श्री कैंची धाम | Aayi maut tal gayi -Shri Kainchi Dham

आई मौत टल गई - श्री कैंची धाम | Aayi maut tal gayi -Shri Kainchi Dham
नीम करोली बाबा की कृपा से पूरे विश्व के अनगिनत भक्तो के जीवन में चमत्कार हुवे और उनमें से बहुत के प्राणों की रक्षा भी स्वयं बाबा ने कि । इसी संदर्भ में आज हम आपको एक सत्य घटना बताने जा रहे है जिसे जानकर आपको ये पूर्ण विश्वास हो जाएगा कि महाराज जी अर्थात नीम करोली बाबा के लिए कुछ भी असंभव नहीं था ।
हेमदा का बड़ा पुत्र, रब्बू (रविन्द्र कुमार जोशी) तब जमशेदपुर में विजय मशीनरी (उषा सेल्स) में सेल्स - ब्रांच में था। सेल्स के सिलसिले में वह राँची गया था। अपने काम के बाद एक साझे की टैक्सी से वह जमशेदपुर वापिस आ रहा था। चाईबासा से काफी पहले टैक्सी का ब्रेक फेल हो गया और उस पहाड़ी ढाल वाली सड़क पर टैक्सी बिना ब्रेक -क्लच के ट्रोल के नीचे को दौड़ पड़ी - तेज, और तेज। स्थिति समझकर 21 - 22 वर्ष का रब्बू जोर से चिल्ला उठा, महाराज ! उसका इस तरह चिल्लाना था कि एक चौड़े मोड़ पर टैक्सी एकाएक घूमकर चक्कर लगाने लगी जबकि सरदार ड्राइवर उसे केवल मोड़ पर स्टीयरिंग घुमाकर नीचे जाती सड़क पर लाना चाहता था - नीचे खड्ड में गिरने से बचाने मात्र के लिए। इस …

Kainchi dham ke bhagwan - Shri Kainchi Dham | कैंची धाम के भगवन - श्री कैंची धाम

Kainchi dham ke bhagwan - Shri Kainchi Dham | कैंची धाम के भगवन - श्री कैंची धामश्री कैंची धाम में ऐसा क्या था की आज सारी दुनिया श्री कैंची धाम की ओर आकर्षित हो रही है। होने को तो वो सिर्फ एक हनुमान मंदिर ही था पर उसका इतना प्रभाव कैसे हुवा की दुनिया के बड़े-बड़े उद्योगपति भी श्री कैंची धाम के कायल हो गए। आज इस अद्भुत सत्य को जानिये की श्री कैंची धाम अपने दिव्य हनुमान मंदिर के साथ अपने दिव्य अवतार , हनुमत स्वरुप परम पूज्य नीम करोली बाबा के लिए जाना जाता है। 

पूज्य नीम करोली बाबा भक्तवत्सल ,परम कृपालु और करुणा से ओत प्रोत महान संत थे । उनके हृदय में सम्पूर्ण मानव जाति ही नहीं अपितु संसार के प्रत्येक प्राणी के लिए अपार प्रेम निहित था। 
आज हम आपको एक जीवंत प्रमाण देने जा रहे है जब बाबा स्वयं विद्यालय जा पहुंचे एक भक्त की लड़की की फीस जमा करने। टीटागढ़ पेपर कम्पनी के मैनेजर के सहायक श्री एम.बी.लाल नीम करोली बाबा के बड़े भक्त थे। बाबाजी उन्हें रमेश नाम से पुकारते थे । एक बार बाबाजी के कानपुर आगमन पर वह जानकारी मिलते ही सब कार्य छोड़ कर तत्काल कानपुर जा पहुंचे । लगातार 6 दिन कानपुर रहने के दौरान श…

Neem Karoli Maharaj Ke 108 Mandir | नीम करोली महाराज के 108 मंदिर

Neem Karoli Maharaj Ke 108 Mandir | नीम करोली महाराज के 108 मंदिर 
पूरी दुनियां में नीम करोली महाराज के 108 से अधिक मन्दिर है। लगभग प्रत्येक धर्म में महाराज जी को मानने बाले भक्त है। सभी भक्त और सम्पूर्ण संसार उनके पुत्र के सामान है। फिर जब हम महाराज जी के भक्त या शिष्य व अनुयायी कहलाते है, तब हमे क्यों महसूस नहीं होता। क्योकी हम खुद को  भेद दृष्टी की जंजीरों में बांधे हुवे है। हम जाति-पाती, उंच-नीच, बड़ा भक्त, छोटा भक्त, परिवार का वाहरी, आदी बातों से जूझ रहे है। हम स्वार्थ और अहम् के आगे सर्वम् तक सोच ही नही पा रहे।

हम महाराज जी के आश्रम मे जन्म से मृत्यु तक सेवा देदें, फिर भी अगर 'मैं, भाव बना रहा तब क्या महाराज जी हमें अपनाएंगे? क्या महाराज जी की कृपा भेद दृष्टी वालो को प्राप्त होगी?
महाराज सब देखते हैं,, ज्यादातर सभी भक्त यही कहते है। क्या इसे अनदेखा कर देंगे?
मैं उन सभी भक्तों से माफी चाहता हूँ जिनसे कभी मेरा विवाद रहा या अभी उन्हे लगता है की मेरे साथ उनका विवाद है। पर ऐसा कतई नही हैं। हो सकता है मेरी सोच स्वयं संकुचित हो तो कृपा कर आप खुद की सोच विस्तृत कर दूरियां मिटाये। यही बाब…

कैंची धाम की सिद्घ आत्माएं - श्री कैंची धाम

कैंची धाम की सिद्घ आत्माएं - श्री कैंची धाम
एक दिन कैंची आश्रम में बाबा जी ने रामायाणी श्री शंकर प्रसाद व्यास से कहा ," इन पर्वतों में सिद्ध आत्मायें वास करती है । तू इन्हें रोज़ हनुमानजी की कथा सुनाया कर ।" व्यास जी ने कथा करनी आरम्भ कर दी उस निर्जन स्थान पर केवल कुछ महिलाएं ही कथा सुनने आती थी । तीन दिन तक यही होता रहा । व्यास जी परेशान होकर बाबा के पास गये और बोले ," महाराज कथा तो चल रही है , मगर श्रोता नही आते ।" बाबा बोले," तुझे लोगों से क्या लेना , हमने तुझे सिद्ध आत्माओं को कथा सुनाने को कहीं थी । देख कल एक बूडिया  भी कथा सुनने आयेगी । उसकी भद्दी शक्ल देखकर घृणा न करना, नहीं तो वे शाप दे जायेगी ।"
दुसरे दिन तो बाबा की कृपा से कुटी भरी थी । बहूत सी प्रतिष्ठित हस्तियाँ वहाँ मौजूद थी । ज़्यादातर राजनीतिक लोग थे । इन सबके आगे बूडिया बैठी थी जिसके बारे में बाबा पहले ही बता चूके थे । प्रवचन समाप्त होते ही बूडिया सबसे पहले कमरे से बाहर निकली और एकदम से ग़ायब हो गयी ।
ये सब खेल बाबा की प्रेरणा शक्ति से ही संभव था । जाने कितनी सिद्ध आत्मायें उस कथा को सुन रही …

हनुमान के अवतार नीम करोली बाबा - श्री कैंची धाम

आज पुरे विश्व में पूज्य श्री नीम करोली बाबा जी के असंख्य भक्त है और उनमें से ज़्यादातर भक्तो का मानना है की श्री नीम करोली बाबा श्री हनुमान जी के अवतार थे क्योकि बाबा की जीवन शैली और उनकेचमत्कार इस बात का प्रमाण देते है की उनका सम्बन्ध साक्षात् श्री हनुमान जी से था। इसी तथ्य के प्रमाण के रूप में आज एक घटना का जिक्र हो रहा है। 
कैंची धाम में बाबा एक दिन शंकर प्रसाद व्यास जी के साथ टहल रहे थे । बाबा व्यास जी के कन्धे पर हाथ रख कर चल रहे थे । एकाएक व्यास जी के मन में विचार आया कि लोग कहते है की बाबा को हनुमान के अवतार है , पर इस बात पर विश्वास कैसे किया जाये । अभी वे सोच ही रहे थे कि बाबा का कंधे पर रखा हाथँ उनको भारी महसूस होने लगा और धीरे-धीरे उसका भार बड़ता ही चला गया । यहाँ तक कि उनका कंधा जवाब देने लगा । हाथ सहज रूप से आपके कन्धे पर पड़ा था उसका आकार भी यथावत था । व्यास जी बहूत  परेशान हो गये । प्रेम से रखे इस महान विंभूति के हाथ को हटाने में व्यास जी को संकोच हो रहा था , पर उसका भार बड़ता जा रहा था जो व्यास जी के सहन से बाहर था । अपनी ऐसी विवशता में व्यास जी मन ही मन प्रार्थना करने ल…

नीम करोली बाबा ने युधिष्ठिर को दिया प्राण दान - श्री कैंची धाम

नीम करोली बाबा ने युधिष्ठिर को दिया प्राण दान  - श्री कैंची धाम
नीम करोली बाबा जी के भगत श्री ओंकार सिंह जी के पुत्र ,युधिष्ठिर सिंह के साथ बाबा नीम करोली उसी की गाड़ी में भूमियाधार आये थे। रात्रि विश्राम के बाद सुबह ब्रम्ह मुहूर्त के अंधेरे में ही युधिष्ठिर और उमादत्त शुक्ल मंदिर से बाहर आ गए कि अंधेरे-अंधेरे में ही शौचादि से निपट लें। कुछ दूर पर एक चट्टान पर से अपना कोट जैसे ही उठाना चाहा कि उन्हें एक काले नाग(कोबरा) ने डस लिया। युधिष्ठिर चिल्लाते हुए मंदिर की तरफ भागे कि," साँप ने काट लिया ", पर आधे मार्ग में ही अचेत होकर गिर पड़े । कुछ ही देर में उनका सारा शरीर विष के प्रभाव से काला पड़ गया और उन्हें अन्य लोग मंदिर के पास ले आये । वे सब प्रकार से मृत हो चुके थे।

उधर नीम करोली बाबा चिल्लाते रहे कि ,"युधिष्ठिर मर गया है। इसके बाप को खबर भेज दो"। कुछ देर बाद उन्होनें बृहमचारी बाबा को डाँट लगाई कि ,"देखते क्या हो । इसे खूब तेज चाय पिलाओ"। ऐसा ही करने का प्रयास किया गया पर मृत(?) को कैसे पिलाई जाती चाय ? तब बाबा जी स्वयं आये ,युधिष्ठिर को डाँट कर कहा ," उठ…

Neem Karoli Baba ka Farman - Shri Kainchi Dham

नीम करोली बाबा का फरमान- श्री कैंची धाम 
यू तो नीम करोली बाबा के चमत्कारों के अनेकों किस्से प्रचलित है और विश्व विख्यात है फिर चाहे एप्पल कम्पनी को जन्म देने की बात हो या फेसबुक कम्पनी को डूबने से बचाने का किस्सा हो। आज हम एक और सत्य घटना आप सबके सामने लेकर आए है जिसमें नीम करोली बाबा ने अपने एक प्रशासनिक भक्त का कल्याण किया।ये बात उस समय की  है जब श्री नीम करोली बाबा ने एक पुलिस सब इंस्पेक्टर को पुलिस कप्तान बनने का लिखित फरमान जारी कर दिया था। 
पुलिस सब इंस्पेक्टर राम नारायण सिन्हा धीरे धीरे बाबा नीम करोली  के भक्त हो चले थे। एक बार जब वह बाबाजी से मिलने गये तो बाबाजी ने उनसे कागज व पेन ले आने को कहा। कागज पेन लेकर महाराज जी  ने उस
पर राम राम लिखना प्रारम्भ कर दिया, जब पूरा कागज भर गया तो अन्त में बाबाजी ने लिख दिया कि तू पुलिस कप्तान बनेगा तथा अपना अंगूठा लगाकर नीचे लिख दिया बाबा नीम करोली साथ ही यह कागज श्री सिन्हा के हाथ में थमा दिया।

अंग्रेजी शासनकाल में कैसे एक हिंदुस्तानी दरोगा आई.पी.एस. अफसर बन जायेगा इस बात पर रत्ती भर यकीन न करते हुये भी उन्होने वह कागज अपने पास रख लिया!
सब इंस्…

नीम करोली बाबा गायब हो गए - श्री कैंची धाम

नीम करोली बाबा गायब हो गए - श्री कैंची धाम । Neem karoli baba gayab ho gaye - Shri Kainchi Dham
एक बार कांग्रेस के कुछ पचास साठ कार्यकर्ता महाराज जी के दर्शन के लिए आ रहे थे । उस वक्त महाराज जी हनुमानगढ़ में थे। महाराज जी ने दूर से देख लिया कि वे लोग आश्रम की तरफ आ रहे हैं। उन्होंने एक भारतीय संन्यासी रामदास को साथ लिया और पहाड़ी से नीचे उतरकर एक देवी मंदिर में चले गये।
इधर पार्टी के लोग जब आश्रम में पहुंचे तो उन्होंने महाराज जी के बारे में पता किया। वहां लोगों ने बता दिया कि वे पहाड़ी से नीचे की तरफ गये हैं।वे  लोग नीचे उतरकर उसी मंदिर के पास पहुंच गये जहां महाराज जी रामदास के साथ मंदिर के बाहर ही बैठे हुए थे।वे लोग साठ फीट दूर खड़े होकर मंदिर के चारों तरफ देखने लगे लेकिन उन लोगों को न महाराज जी दिखाई दिये और न ही रामदास।
उन्हीं के सामने खड़े होकर वे लोग नीम करौली बाबा के बारे में आपस में पूछताछ कर रहे थे लेकिन महाराज जी उनको दिखाई नहीं दे रहे थे अर्थात नीम करोली बाबा गायब हो गए परन्तु केवल उनलोगो की दृस्टि में। 
तभी रामदास को बड़ी जोर की खांसी आने को हुई. वे हशीश पीते थे और उनको खांसी आ…

श्रद्धा और विश्वास - श्री कैंची धाम

        श्रद्धा और विश्वास - श्री कैंची धाम
श्रद्धा और विश्वास का केंद्र है श्री कैंची धाम। सन 1974 में स्टीव जोब्स श्री ब्रह्मचारी बाबा जी के साथ श्री कैंची धाम आश्रम मे जो की नैनीताल से 38 किमी दूर भवाली के रास्ते में पड़ता है आ पहुंचे । बाबा नीम करोली ने इस स्थान पर सन 1964 में आश्रम बनाया था। इन्‍हीं बाबा नीब करौरी को हनुमान जी का धरती पर दूसरा रूप कहा जाता है। वैसे बाबा का असली नाम श्री लक्ष्मी नारायण शर्मा था। महाराज जी द्वारा स्थापित ये आश्रम अपनी स्‍थापना के बाद से अब तक भव्य मंदिर का रूप ले चूका है जहाँ  मां दुर्गा, वैष्णो देवी, हनुमान जी और राधा कृष्ण की मूर्तियां विराजमान हैं। मंदिर में आज भी बाबा की निजी वस्तुएं, गद्दी, कंबल, छड़ी आज भी वैसे ही सुरक्षित हैं जैसी उनके जीवन में थीं। पर्यटकों के लिए आज वही मुख्य दर्शन का केंद्र हैं।
दिव्य शक्तियों के स्वामी माने जाते हैं
कहते हैं कि इस मंदिर के संस्‍थापक बाबा दिव्य शक्तियों के स्वामी थे, पर वे आडंबरों से दूर रहते थे। उनके माथे पर न त्रिपुण्ड लगा होता था न गले में जनेऊ और कंठमाला। उन्‍होंने देह पर साधुओं वाले वस्त्र भी कभी धारण न…

नीम करोली बाबा का प्रसाद - श्री कैंची धाम

नीम करोली बाबा का प्रसाद - श्री कैंची धाम
नीम करोली बाबा कहो या नीब करोरी बाबा हर शब्द में केवल एक ही अर्थ निकलता है कि बाबा हम आपके है और आप हमारे है । अपने हर भक्त और उसके परिवार के पालन पोषण का बाबा सदैव ध्यान रखते है ।
एक बार की विचित्र घटना है लखनऊ में महाराजजी ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों को साथ लिया और सबसे गरीब मुहल्ले की तरफ सड़क नाली पानी की हालत देखने पहुंच गये। वहां पहुंचकर उन्होंने एक मुसलमान को अपने पास बुलाया और बोले- मुझे भूख लगी है।
मुसलमान ने कहा, लेकिन महाराजजी मेरे पास खिलाने के लिए कुछ भी नहीं है।
महाराजजी ने कहा, "तूने घर के छप्पर में दो रोटी नहीं छिपा रखी है दुष्ट?"उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि महाराजजी को कैसे पता चला? वह छप्पर में से दो रोटी निकाल लाया। एक रोटी महाराजजी ने खाई और दूसरी रोटी अधिकारियों को दे दी जिसमें हिन्दू ब्राह्मण भी थे। महाराजजी ने कहा, "प्रसाद लो।"
(रामदास, मिराकल आफ लव, दूसरा संस्करण, 1995, पेज- 43-45)
इस प्रकार नीम करोली बाबा ने अपने भक्तो में प्रसाद का वितरण किया और सबकी मनोकामनाएं पूर्ण की ।
जय श्री कैंची धाम की

नीम करोली बाबा द्वारा प्राण रक्षा -श्री कैंची धाम

नीम करोली बाबा द्वारा प्राण रक्षा -श्री कैंची धाम !! एक विचित्र अनुभव
घटना 4 नवम्बर 1971 की है। नीम करोली बाबा की एक अमेरिकी भक्त महिला जिसे वे राधा कहा कहते थे, वृन्दावन में आनन्दमयी माँ के आश्रम से अपनी अमेरिकी सहेली अन्जनी (भारतीय नाम) के साथ एक रिक्शा में आ रही थी। रिक्शा का चालक बहुत तेजी से रिक्शा भगा रहा था। राधा जी ने एकाएक भयवश अपनी आँखें बन्द कर ली थी। तुरंत उन बन्द आँखों से उनको महाराज जी के मुख का दर्शन हुआ। ऐसा अनुभव इससे पूर्व उनको कभी नहीं हुआ था ।राधा जी कहती हैं कि इस दर्शन में महाराज मुझसे कह रहे थे, "दुर्घटना होने जा रही है, कूद पड़।" मैंने तुरंत उनकी आज्ञा का पालन किया। मैंने जानते बूझते यह कार्य किया - बड़ी शान्ति और बिना किसी अन्तर्द्वन्द्व के।
इस कार्य में न मुझे कुछ भय था और न मेरे दिल की कोई धड़कन ही रुकी। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि मैं अन्जनी से कुछ कह भी नहीं पायी।मेरे कूदने का कोई कारण प्रत्यक्ष न था, कोई भी दर्शक मुझे पागल कह सकता। उसी क्षण वहाँ चौराहे में एक दूसरा रिक्शा हमारे रिक्शा से टकरा गया। अन्जनी को थोड़ी चोट आयी। वह मेरे उपचार से ही स्वस्थ हो गई…

भुवन चंद की भूख - श्री कैंची धाम | Bhuvan Chand's hunger - Shri Kainchi Dham

भुवन चंद की भूख  - श्री कैंची धाम | Bhuvan Chand's hunger - Shri Kainchi Dham
भुवन चंद की भूख-
जिस प्रकार माता-पिता अपने बच्चो को कभी भूखा नहीं देख सकते ठीक उसी प्रकार का स्वभाव गुरुदेव का भी होता है। श्री नीम करोली बाबा भी कुछ अद्भुत संत ही थे। उनकी हर लीला अपने आप में एक उपदेषात्मक लीला होती थी। अपने भक्तो पर बाबा उसी प्रकार कृपा करते थे जैसे माता-पिता अपने बच्चो पर करते है। कोई बाबा को श्री हनुमान जी का परम भक्त बोलता था तो कोई स्वयं हनुमान जी का अवतार।आज हम आपको श्री भुवन चंद तिवारी जी के जीवन की वो सत्य घटना सुनाने जा रहे है जब वे रोडवेज स्टेशन भवाली में लिपिक थे। उसी समय की घटना है जब भुवन चंद जी को एक दिन किसी दुसरे कर्मचारी की अनुपस्तिथि में काम करने के लिए ब्रिवरी स्टेशन भेजा गया।
भुवन चंद  उस दिन घर से बिना खाए ही काम पर निकल गए थे और वहाँ अवकाश न मिल पाने के कारण भूखे ही काम करते रहे। महाराज जी तब भूमियाधार में थे। वह अपने भक्तों को भूखा ना देख सके। तिवारी जी बताते हैं कि बाबा ने दिन के एक बजे एक बड़ी टोकरी में पूड़ी सब्जी आदि बांधवाकर ब्रिवरी स्टेशन को जाती हुई एक बस के कं…

बाबा आप कौन है ? -श्री कैंची धाम | Baba, who are you? - Shri Kainchi Dham

बाबा आप कौन है ? -श्री कैंची धाम | Baba, who are you? - Shri Kainchi Dham
श्रीमति रमा जोशी पूज्य श्री नीम करोली बाबा जी की अनन्य भक्त थी और बाबा को बहुत मानती थी। उन्होंने अपने जीवन से जुडी अद्भुत कथा को  कहा की बाबा के रूप को वो कभी समझ नहीं पाती थी और बाबा से एक दिन बोली की ," आप बताते क्यूँ नही कि बाबा आप कौन है ? आपकी ये उल्टी सीधी लीलाये क्या है और किसलिये है ?  उन्होंने कई बाबा के भक्तों से पूछा मगर कोई संतोषप्रद उतर न मिला । तब बाबा बोले ,कोई नहीं समझा सकता तूझे । समय आने पर मैं ही समझाँऊगा । एक दिन मैंने उनसे कहा , कि बाबा मेरी तो कागभूशूडि सी गति हो गई है । वे बोले," वो तो होगी ही ।" फिर नीम करोली बाबा बोले," अपने जन के कारणा , श्री कृष्ण बने रघूनाथ ।""
एक दिन मूझे ग़ुस्सा आया और मैं बोली , आपके पास आना निरर्थक है । आप सत्य नहीं बताते ।" आप धोखा देते है  । " तब बाबा बोले," तेरी सौं मैं सब कूछ बता दूँगा । तेरे विचार ख़राब हो गये है मेरे लिये । तू मुझे बाल रूप में क्यों नहीं देखती । मैं कूछ सोचूँ उससे पहले ही बाबा तख़्त से उतरे और मेरी…

गंगा जी में दूध बहता है - श्री कैंची धाम | Milk flows in Ganga- Shri Kainchi Dham

गंगाजी में दूध बहता है - श्री कैंची धाम | Milk flows in Ganga - Shri Kainchi Dham
जय श्री कैंची धाम 
प्रिय भक्तों आज हम आपको सन 1960 की एक सत्य घटना सुनाने जा रहे हैं जो की परम पूज्य श्री नीम करौली बाबा( श्री नीब करोरी बाबा जी) के जीवन से जुड़ी हुई है और बाबा के द्वारा किए गए अनेको चमत्कारों में से एक चमत्कार के संबंध में है। माघ मेला चल रहा था और महाराज जी के दर्शनों को लगातार भक्तों का ताता लगा हुआ था। महाराज जी के दर्शनों से जैसे सभी की मनोकामनाएं  रही थी। 
उसी दौरान महाराज जी ने अपने भक्तों को बताते बताया की गंगा जी में जल नहीं दूध बहता रहता है। महाराज जी के ये अनोखे एवं अद्भुत वाक्य को सुन के सभी भक्त बड़े अचंभित हुवे। सभी भक्त आपस में वार्ता करने लगे की गंगा जी में तो जल प्रवाहित होता है पर महाराज श्री का कहना है कि गंगा में दूध प्रवाहित होता है। इस बात से सभी अचंभित थे। 
एक दिन जब महाराज जी कुछ अन्य भक्तों के साथ गंगा जी में नौका विहार कर रहे थे तब कुछ भक्तों ने सोचा कि क्यों ना महाराज जी की बात का परीक्षण किया जाए हालांकि उन्होंने महाराज जी से कुछ नहीं कहा लेकिन नीम करोली बाबा तो …

क्या राम कथा में हनुमान जी आते हैं ? | Story of Hanuman Ji

क्या राम कथा में हनुमान जी आते हैं ? | Story of Hanuman Ji
एक पंडित जी  राम कथा सुना रहे थे। लोग आते और आनंद विभोर होकर जाते। पंडित जी का नियम था रोज कथा शुरू  करने से पहले "आइए हनुमंत जी  बिराजिए" कहकर हनुमान जी का आह्वान करते थे, फिर एक घण्टा प्रवचन करते थे।वकील साहब हर रोज कथा सुनने आते। वकील साहब के भक्तिभाव पर एक दिन तर्कशीलता हावी हो गई।
उन्हें लगा कि महाराज रोज "आइए हनुमंत जी बिराजिए" कहते हैं तो क्या हनुमान जी सचमुच आते होंगे!
अत: वकील साहब ने पंडित जी से पूछ ही डाला- महाराज जी, आप रामायण की कथा बहुत अच्छी कहते हैं।
हमें बड़ा रस आता है परंतु आप जो गद्दी प्रतिदिन हनुमान जी को देते हैं उसपर क्या हनुमान जी सचमुच बिराजते हैं?
पंडित जी  ने कहा… हाँ यह मेरा व्यक्तिगत विश्वास है कि रामकथा हो रही हो तो हनुमान जी अवश्य पधारते हैं।
वकील ने कहा… महाराज ऐसे बात नहीं बनेगी।
हनुमान जी यहां आते हैं इसका कोई सबूत दीजिए ।
आपको साबित करके दिखाना चाहिए कि हनुमान जी आपकी कथा सुनने आते हैं। महाराज जी ने बहुत समझाया कि भैया आस्था को किसी सबूत की कसौटी पर नहीं कसना चाहिए यह तो भक्त और भगव…

लकड़ी का पुल और बाबा नीम करोली | Wooden bridge and baba neem karoli

लकड़ी का पुल और बाबा नीम करोली| Wooden bridge and baba neem karoli
यह बात 1966 की है। तब कैंची नदी पर इतना बड़ा पुल नहीं था। एक लकड़ी का छोटा सा पुल था। कई बार दोपहर में नीम करोली बाबा वहीं जाकर बैठ जाते थे और भोजन करते थे। पंद्रह जून के भंडारे से पहले एक दिन वे उसी पुल पर बैठे हुए थे कि बरेली से एक भक्त आये। ट्रक में कुछ पत्तल और कसोरे (मिट्टी का बर्तन) साथ लाये थे भंडारे के लिए। उन्होंने वह सब वहां अर्पित करते हुए मुझसे कहा, "दादा बताइये और क्या जरूरत है?"

मेरे नहीं कहने के बाद भी वे बार बार यही जोर देते रहे कि बताइये और क्या चाहिए। बताइये और क्या चाहिए। उनके बहुत जोर देने पर मैंने कह दिया कि दो खांची (बांस का बना बड़ा बर्तन) कसोरे और भेज दीजिएगा।
तब तक बाबाजी चिल्लाये। क्या? क्या करने जा रहे हो तुम उसके साथ मिलकर? है तो सबकुछ। तुम बहुत लालची हो गये हो। कोई कुछ देना चाहे तो तुम तत्काल झोली फैला देते हो।" मैं चुप रहा।
प्रसाद लेने के बाद जब वह व्यक्ति जाने के लिए तैयार हुआ और महाराज जी के पास उनके चरण छूने पहुंचा तो सौ रूपये का नोट निकालकर रख दिया। महाराज जी ने तत्काल वह सौ …

हनुमानजी का चित्र घर में कहाँ लगायें? | Where to put Hanumanji's picture in the house?

हनुमानजी का चित्र घर में कहाँ लगायें? | Where to put Hanumanji's picture in the house?
श्रीराम भक्त हनुमान साक्षात एवं जाग्रत देव हैं। हनुमानजी की भक्ति जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी। कठिन इसलिए की इसमें व्यक्ति को उत्तम चरित्र और मंदिर में पवित्रता रखना जरूरी है अन्यथा इसके दुष्परिणाम भुगतने होते हैं |
हनुमानजी की भक्ति से चमत्कारिक रूप से संकट खत्म होकर भक्त को शांति और सुख प्राप्त होता है। विद्वान लोग कहते हैं कि जिसने एक बार हनुमानजी की भक्ति का रस चख लिया वह फिर जिंदगी में अपनी बाजी कभी हारता नहीं। जो उसे हार नजर आती है वह अंत में जीत में बदल जाती है। ऐसे भक्त का कोई शत्रु नहीं होता। आपने हनुमानजी के बहुत से चित्र देखे होंगे। जैसे- पहाड़ उठाए हनुमानजी, उड़ते हुए हनुमानजी, पंचमुखी हनुमानजी, रामभक्ति में रत हनुमानजी, छाती चीरते हुए, रावण की सभा में अपनी पूंछ के आसन पर बैठे हनुमानजी, लंका दहन करते हनुमान, सीता वाटिका में अंगुठी देते हनुमानजी, गदा से राक्षसों को मारते हनुमानजी, विशालरूप दिखाते हुए हनुमानजी, आशीर्वाद देते हनुमानजी।

राम और लक्षमण को कंधे पर उठाते हुए हनुमानजी, रामायण प…

Neem Karoli Guru Purnima | नीम करोली गुरु पूर्णिमा |

नीम करोली गुरु पूर्णिमा -कैंची धाम सर्व प्रथम आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभ कामनाएं।  परम गुरुदेव श्री नीम करोली बाबा जी का आशीर्वाद आप सभी को निरंतर प्राप्त होता रहे बस इसी कामना के साथ हम सब आज के इस पावन पर्व को मनाएंगे। 
सनातन धर्म में गुरु का महत्त्व तो भगवान् से भी अधिक बताया गया है शायद इसी लिए संत कबीर दस जी ने भी लिखा था की "गुरु गोविन्द दोउ खड़े काके लागू पाय , बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताये। " केवल गुरु ही वो साधन है जो हमें भगवान् के दर्शन करवा सकता है पर गुरु योग्य होना चाहिए और भक्त में भक्ति प्रबल होनी चाहिए।  हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है| गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा की जाती है| भारत वर्ष में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है| 
नीम करोली बाबा ने अपने सभी भक्तो को सम्पूर्ण जीवनकाल में असीमित प्रेम और करुणा दी और आज भी बाबा के समाधिस्त होने के बाद भी बाबा के भक्तो और उनके शिष्यों पर परम गुरुदेव नीम करोली बाबा की कृपा का वरदहस्त निरंतर बना हुवा है।  गुरु पूर्णिमा का महत्‍व क्या है ?
गुरु पूर्णिमा के दिन …

You will not go by this bus - Kainchi Dham | तू इस बस से नहीं जायेगा - कैंची धाम |

जय गुरुदेव !! तुम इस बस से नहीं जाओगे  !!
नीम करोली बाबा की जय। प्रिय गुरु भाइयो और गुरु प्रेमियों आज आप सभी को एक छोटी सी कहानी सुनाने जा रहे है जिसे सुनकर आपको नीम करोली बाबा की सर्वज्ञता का एहसास हो जायेगा। बाबा के चमत्कारों की कहानियो की संख्या अनंत है और उनके व्याख्यान के लिए शब्द काम पद जाते है पर फिर भी महाराज जी की कृपा से जीता हो सकता है उतनी गुरु चमत्कारों की कहानियो का अमृत हम आप सभी को पिलाते रहेंगे।  कैंची धाम आश्रम में कुछ समय निवास करने के बाद प. शंकर प्रसाद व्यास जी अपने घर बनारस लौटने की तैयारी करने लगे। उन्होंने रेलवे स्टेशन काठगोदाम पहुँचने के लिए एक सुविधाजनक बस भी निश्चित कर ली और बाबा के पास उनका आशीर्वाद लेने उपस्थित हुए। महाराज जी बोले, "तू इस बस से नहीं जायेगा।" पर उसी दिन उन्होंने आप को दूसरी बस से विदा कर दिया। आप कहते हैं कि जिस बस से मैं आना चाहता था, वह रास्ते में मुझे एक दुर्घटना में क्षतिग्रस्त दिखाई पड़ी। महाराज जी के शब्दों की यथार्थता तब मैं समझ पाया।श्री बाबा नीम करौली जी महाराज की सर्वज्ञता सर्व विदित है। अलौकिक यथार्थ से मुद्रलेखन श्री नीम कर…

Guru Bhakti NeemKaroli Baba - Shri Kainchi Dham

 गुरु भक्ति Guru Bhakti NeemKaroli Baba - Shri Kainchi Dham भक्त रामदास की कहानी उन्ही की ज़ुबानी  एक दिन मैं महाराज जी से कुछ दूरी पर उनके सामने ही बैठा हुआ था। बहुत सारे भक्त उनके आसपास बैठे हुए थे। बात हो रही थी। हंसी मजाक चल रहा था। कुछ उनके पैरों की मालिश कर रहे थे। लोग उन्हें सेव और फूल दे रहे थे। वे उन चीजों को प्रसाद रूप में लोगों में वितरित कर रहे थे। सब तरफ प्रेम और करुणा बरस रही थी। लेकिन मैदान में कुछ दूरी पर मैं अलग ही अवस्था में बैठा हुआ था।
मैं सोच रहा था कि सब ठीक है लेकिन यह सब तो एक मूर्तरूप से जुड़ा प्रेम है। मैंने यह कर लिया अब मुझे इसके परे जाना है। वे कुछ खास नहीं हैं हालांकि वे सबकुछ हैं। मैं दुनिया में जहां कहीं भी हूं, उनके चरणों में हूं। मैं उनके साथ जिस अवस्था में जुड़ा हूं उसके लिए शरीर की मर्यादा का होना जरूरी नहीं है। जागृत अवस्था में हम एक हैं।
तभी मैंने देखा कि महाराज जी (नीम करोली बाबा), एक बुजुर्ग भक्त के कान में कुछ कह रहे हैं और वह बुजुर्ग भक्त भागकर मेरे पास आया और मेरे पैर छूकर खड़ा हो गया। मैंने पूछा, "आपने यह क्यों किया?" उन्होंने कहा, "…