Skip to main content

Posts

Showing posts from October, 2020

Most Popular Post

दिव्य ज्ञान का अनावरण: Exploring the Secrets of Vedas and Upanishads

प्राचीन ग्रंथों में ज्ञान और आध्यात्मिक ज्ञान की कुंजी छिपी है। इस आकर्षक लेख में, हम वेदों और उपनिषदों की गहराई में उतरते हैं, उन गहन शिक्षाओं और अंतर्दृष्टि को उजागर करते हैं जिन्होंने सदियों से मानवता का मार्गदर्शन किया है। वेद, अस्तित्व में सबसे पुराने पवित्र ग्रंथ माने जाते हैं, जो दिव्य रहस्यों की गहन खोज प्रदान करते हैं। ब्रह्मांड की प्रकृति के बारे में गहन ज्ञान प्रकट करते हुए, वेद आध्यात्मिक साधकों को परम सत्य को उजागर करने का मार्ग प्रदान करते हैं। वेदों की शिक्षाओं का विस्तार करने वाले दार्शनिक और रहस्यमय ग्रंथों, उपनिषदों के साथ, यह लेख व्यक्तिगत आत्मा (आत्मा) और सार्वभौमिक चेतना (ब्रह्म) के बीच गहन संबंध पर प्रकाश डालता है। इन प्रतिष्ठित ग्रंथों में पाई जाने वाली प्रमुख अवधारणाओं और ज्ञान की सावधानीपूर्वक जांच के माध्यम से, हम उस कालातीत ज्ञान को उजागर करते हैं जो पीढ़ियों से आगे निकल गया है। इस ज्ञानवर्धक यात्रा में हमारे साथ शामिल हों क्योंकि हम वेदों और उपनिषदों के रहस्यों का पता लगाते हैं, सदियों पुराने ज्ञान को उजागर करते हैं जो हमारे आधुनिक जीवन में प्रास

Khul gaya Kainchi Dham -Neem Karoli Baba

खुल गया कैंची धाम मंदिर, मंदिर परिसर में करना होगा इन नियमों का पालन उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम के कपाट 1 जुलाई, बुधवार से खोल दिए गए हैं। भक्तों के लिए 24 मार्च से कैंची धाम के कपाट बंद कर दिए गए थे। एक बार फिर से कपाट खुलने से यहां पर भक्तों का आगमन शुरू हो जाएगा। कैंची धाम की बहुत मान्यता हैं, यहां पर देश- विदेश से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां से कोई भी खाली हाथ नहीं जाता है। यहां आने मात्र से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है। हर साल 15 जून को लगता है भव्य भंडारा हर साल 15 जून को कैंची धाम में विशेष भंडारा लगता है। 15 जून को कैंची धाम के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाबा नीब करौरी महाराज जी ने 15 जून 1964 को कैंची धाम में हनुमान जी की प्रतिमा की प्रतिष्ठा की थी। इस दिन देश-विदेश से यहां लोग बाबा के दर्शन करने और पावन प्रसाद को ग्रहण करने आते हैं। इस बार कोरोना वायरस की वजह से यहां पर भव्य भंडारे का आयोजन नहीं किया गया था। नियमों का पालन करना होगा अनिवार्य दर्शन का समय कैंची धाम के कपाट भक्तों के लिए 1 जुलाई से