Skip to main content
Independent Devotee-Run Website ShriKainchiDham.org is an independent informational and devotional blog created by devotees of Neem Karoli Baba. It is not the official website of Shri Kainchi Hanuman Mandir Trust.
Official Temple Website

Most Popular Post

कैंची धाम और चार धाम यात्रा पैकेज 2026: कम खर्च में कैसे करें प्लान? (टूर पैकेज और हेलीकॉप्टर बुकिंग)

शुक्रवार का देवता कौन है? शुक्रवार का मंत्र क्या है?

शुक्रवार का दिन देवी महालक्ष्मी और शुक्र देव का दिन माना जाता है। शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में सुख-सुविधा की कमी नहीं रहती। साथ ही, शुक्र ग्रह की शुभता से सौंदर्य में निखार, ऐश्वर्य, कीर्ति और धन-दौलत प्राप्त होती है।

Shukrawar ( Friday) Ka Devta

शुक्रवार को मां संतोषी की पूजा और व्रत भी किया जाता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, मां संतोषी को भगवान श्री गणेश की पुत्री माना जाता है। मान्यता है कि मां संतोषी की पूजा करने से साधक के जीवन में आ रही तमाम तरह की समस्याएं दूर होती हैं और उसे सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। साथ ही, जिन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं हो पा रहा वो संतान प्राप्ति के लिए इस व्रत को करते हैं। शुक्रवार को वैभव लक्ष्मी व्रत भी रखा जाता है. हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, माता वैभव लक्ष्मी से सुख-समृद्धि और धन-धान्य का आशीर्वाद पाने के लिए शुक्रवार का व्रत सबसे उत्तम उपाय है। 
शुक्रवार का नाम शुक्र देवता के नाम पर ही पड़ा है। नॉर्स पौराणिक कथाओं में फ्रिग ओडिन की पत्नी हैं। उन्हें विवाह की देवी माना जाता था।

शुक्रवार को किसका व्रत करना चाहिए?

शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी, और संतोषी माता की पूजा की जाती है। मान्यता है कि शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि आती है. मां संतोषी को सुख-शांति और वैभव का प्रतीक माना जाता है। 

शुक्रवार का व्रत तीन तरह से किया जाता है: भगवान शुक्र, संतोषी माता, वैभवलक्ष्मी देवी।

शुक्रवार के व्रत में पूजा मुख्य रूप से शाम के समय सूर्य ढलने के बाद की जाती है। शुक्रवार के व्रत में 7, 11 या 21 व्रत रखने का संकल्प लिया जाता है। पूरे दिन मन में मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करते रहना चाहिए। दिन में नमक नहीं खाना चाहिए और सिर्फ़ फलाहार करना चाहिए। 
शुक्रवार का व्रत रखने से सभी तरह की समस्याएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शुक्र ग्रह के दोषों को दूर करने के लिए शुक्रवार का व्रत बहुत प्रभावी होता है। मां संतोषी के व्रत से जीवन में सभी तरह की खुशियां आती हैं। मां वैभव लक्ष्मी के व्रत से धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शुक्रवार के दिन, माता संतोषी की पूजा-अर्चना करने के लिए घर के पवित्र स्थान पर उनकी मूर्ति या तस्वीर स्थापित करनी चाहिए। एक बड़े पात्र में शुद्ध जल भर लेना चाहिए फिर उस जल भरे पात्र के ऊपर एक कटोरी में गुड़ और भुने हुए चने रखें। अब मां की प्रतिमाके समक्ष एक दीपक जलाना चाहिए। माता संतोषी की विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके बाद शुक्रवार व्रत की कथा सुननी चाहिए। ध्यान रहें कथा सुनते या पढ़ते समय अपने हाथों में गुड़ और भुने चने ज़रूर रखें. फिर संतोषी मां की आरती करें। आरती के बाद माता को भोग लगाएं और फिर उस प्रसाद को बाटें।
शुक्रवार के दिन, स्त्री-पुरुष देवी लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हुए श्वेत अथवा लाल रंग के पुष्प, श्वेत या लाल चंदन से पूजा करें। चावल और खीर से भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस व्रत के दिन उपासक को एक समय भोजन करते हुए खीर अवश्य खानी चाहिए।
शुक्रवार का व्रत शुक्‍त पक्ष के प्रथम शुक्रवार से शुरू करना चाहिए। अगर आप माघ महीने में इस व्रत को प्रारंभ करते हैं तो अति उत्‍तम होता है। मलमास या खरमास में इस व्रत को प्रारंभ नहीं करना चाहिए।

माता महालक्ष्मी का मंत्र

मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कई मंत्र हैं। इनमें से कुछ मंत्र ये हैं:
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः
ऊँ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊँ महालक्ष्मी नमः
ऊँ श्रीं क्लीं महालक्ष्मी महालक्ष्मी एह्येहि सर्व सौभाग्यं देहि मे स्वाहा
ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नम
ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम
ॐ लक्ष्मी नारायण नम
धनाय नमो नम 
इन मंत्रों का जाप करने से जीवन में खुशहाली, धन, वैभव, और समृद्धि आती है। इन मंत्रों को जपने से धन की कमी दूर होती है। सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए महालक्ष्मी के मंत्र का करीब 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। अगर जीवन में आर्थिक तंगी से गुजरना पड़े, तो ऊँ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा का जाप करना शुभ होता है।

संतोषी माता का मंत्र

संतोषी माता की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप किया जाता है:
जय माँ संतोषिये देवी नमो नमः
श्री संतोषी देव्व्ये नमः
ॐ श्री गजोदेवोपुत्रिया नमः
ॐ सर्वनिवार्नाये देविभुता नमः
ॐ संतोषी महादेव्व्ये नमः
ॐ सर्वकाम फलप्रदाय नमः
ॐ ललिताये नमः
ॐ श्री संतोषी महामाया गजानंदम दायिनी शुक्रवार प्रिये देवी नारायणी नमोस्तुते
संतोषी माता को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार का दिन सबसे अच्छा माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन संतोषी माता का व्रत रखने वाली महिलाओं को मां जल्दी प्रसन्न होती हैं और घर को धन-धान्य से भर देती हैं।
संतोषी माता को भोग में चना, गुड़, और केला चढ़ाया जाता है। इसके अलावा, उन्हें फूल, माला, सिंदूर, अक्षत आदि भी चढ़ाए जाते हैं। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाकर धूप दिखानी चाहिए और व्रत कथा, चालीसा, मंत्र पढ़कर आरती करनी चाहिए।

Share This Article

Help others discover and share this article.

Comments

Popular posts from this blog

विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र | 1000 नाम हिंदी अर्थ सहित | Vishnu Sahasranamam

विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम Vishnu Sahasranamam Stotram ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः प्रिय भक्तों, विष्णु सहस्रनाम भगवान श्री हरि विष्णु (नारायण) के एक हजार दिव्य नामों का पवित्र संग्रह है। महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया यह स्तोत्र हिन्दू धर्म के सर्वाधिक प्रभावशाली एवं लोकप्रिय स्तोत्रों में से एक है। नियमित पाठ से मानसिक शांति, पापों का नाश, बृहस्पति ग्रह की शांति, सुख-समृद्धि और मोक्ष मार्ग खुलता है। श्रद्धा एवं शुद्ध भाव से किया गया पाठ ही सबसे बड़ा फल देता है। विष्णु सहस्रनाम पाठ के लाभ मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं यश, सुख, ऐश्वर्य, आरोग्य एवं सौभाग्य की प्राप्ति बिगड़े कार्यों में सफलता कुंडली में बृहस्पति के दुष्प्रभाव का शमन भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति सभी ग्रहों एवं नक्षत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पाठ के नियम पाठ से पहले स्नान कर पवित्र रहें सात्विक व्रत रखकर पाठ करें पीले वस्त्र धारण करें भगवान विष्णु की विधिवत पूजा क...

हनुमान वडवानल स्रोत महिमा - श्री कैंची धाम | Hanuman Vadvanal Stotra Mahima - Shri Kainchi Dham

हनुमान वडवानल स्रोत महिमा - श्री कैंची धाम | Hanuman Vadvanal Stotra Mahima - Shri Kainchi Dham   श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र की रचना त्रेतायुग में लंका अधिपति रावण के छोटे भाई विभीषण जी ने की थी। त्रेतायुग से आज तक ये मंत्र अपनी सिद्धता का प्रमाण पग-पग पे देता आ रहा है।  श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र के जाप से बड़ी से बड़ी समस्या भी टल जाती है। श्री हनुमान वडवानल स्रोत का प्रयोग अत्यधिक बड़ी समस्या होने पर ही किया जाता है। इसके जाप से बड़ी से बड़ी समस्या भी टल जाती है और सब संकट नष्ट होकर सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।  श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र के प्रयोग से शत्रुओं द्वारा किए गए पीड़ा कारक कृत्य अभिचार, तंत्र-मंत्र, बंधन, मारण प्रयोग आदि शांत होते हैं और समस्त प्रकार की बाधाएं समाप्त होती हैं। पाठ करने की विधि शनिवार के दिन शुभ मुहूर्त में इस प्रयोग को आरंभ करें। सुबह स्नान-ध्यान आदि से निवृत्त होकर हनुमानजी की पूजा करें, उन्हें फूल-माला, प्रसाद, जनेऊ आदि अर्पित करें। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर लगातार 41 दिनों तक 108 बार पाठ करें।...

Panch Mukhi Hanuman: ॐ नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा का अर्थ

  Sankat Mochan Hanuman भक्ति का स्वरूप, भक्ति का ज्ञान हमें श्री हनुमान जी महाराज से सीखना चाहिए। हनुमान जी महाराज ने भक्ति के द्वारा श्री राम को प्राप्त कियाऔर श्री राम के वरदान स्वरुप समस्त संसार में हनुमान जी की आराधना, उनकी जय जयकार और उनकी प्रतिष्ठा संपन्न हो सकी।  शास्त्रों की माने तो हनुमान जी महाराज भगवान शिव अर्थात महा रूद्र के 11 में रुद्र अवतार हैं और उन्हें शिव स्वरूप भी माना जाता है अर्थात हनुमान जी महाराज स्वयं महादेव के ही अवतार हैं। अतः जब कोई संकट किसी भी प्राणी को महसूस होता है तो वह संकट से छुटकारा पाने के लिए अपनी श्री हनुमान जी महाराज की शरण लेता है और उनसे उस संकट को दूर करने की प्रार्थना करता है। हनुमान जी महाराज अत्यंत ही दयालु हैं। वह अपने शरणागत की रक्षा अवश्य करते हैं। हम सभी को उनके दिव्य मंत्रो के द्वारा उनको प्रसन्न करके उनसे अपनी रक्षा की प्रार्थना करनी चाहिए।   हनुमान जी के भक्तों के द्वारा हनुमान जी को अनेको नाम से संबोधित किया जाता है।  वीर हनुमान, राम भक्त, शिव अवतार, मारुति नंदन, महावीर ये सभी नाम भजरंग बलि के ही है पर इन सभी...