भुवन चंद की भूख - श्री कैंची धाम | Bhuvan Chand's hunger - Shri Kainchi Dham

भुवन चंद की भूख  - श्री कैंची धाम | Bhuvan Chand's hunger - Shri Kainchi Dham
भुवन चंद की भूख-
जिस प्रकार माता-पिता अपने बच्चो को कभी भूखा नहीं देख सकते ठीक उसी प्रकार का स्वभाव गुरुदेव का भी होता है। श्री नीम करोली बाबा भी कुछ अद्भुत संत ही थे। उनकी हर लीला अपने आप में एक उपदेषात्मक लीला होती थी। अपने भक्तो पर बाबा उसी प्रकार कृपा करते थे जैसे माता-पिता अपने बच्चो पर करते है। कोई बाबा को श्री हनुमान जी का परम भक्त बोलता था तो कोई स्वयं हनुमान जी का अवतार।आज हम आपको श्री भुवन चंद तिवारी जी के जीवन की वो सत्य घटना सुनाने जा रहे है जब वे रोडवेज स्टेशन भवाली में लिपिक थे। उसी समय की घटना है जब भुवन चंद जी को एक दिन किसी दुसरे कर्मचारी की अनुपस्तिथि में काम करने के लिए ब्रिवरी स्टेशन भेजा गया।

Kainchi Dham
भुवन चंद  उस दिन घर से बिना खाए ही काम पर निकल गए थे और वहाँ अवकाश न मिल पाने के कारण भूखे ही काम करते रहे। महाराज जी तब भूमियाधार में थे। वह अपने भक्तों को भूखा ना देख सके। तिवारी जी बताते हैं कि बाबा ने दिन के एक बजे एक बड़ी टोकरी में पूड़ी सब्जी आदि बांधवाकर ब्रिवरी स्टेशन को जाती हुई एक बस के कंडक्टर के द्वारा उनके पास भिजवा दिया। बाबा की इस अहेतु कृपा से वे आनंद विभोर हो उठे। भुवन चंद जी ने वह  प्रसाद वहाँ उपस्थित सभी व्यक्तियों को दिया और स्वयं भी प्रेम से इसे ग्रहण किया। इस प्रकार बाबा ने भुवन चंद की भूख को शांत किया।
नीम करोली बाबा की जय हो

श्री कैंची धाम की जय हो
अलौकिक यथार्थ

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