नीम करोली बाबा का प्रसाद – श्री कैंची धाम
नीम करोली बाबा कहो या नीब करोरी बाबा हर शब्द में केवल एक ही अर्थ निकलता है कि बाबा हम आपके है और आप हमारे है । अपने हर भक्त और उसके परिवार के पालन पोषण का बाबा सदैव ध्यान रखते है ।
एक बार की विचित्र घटना है लखनऊ में महाराजजी ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों को साथ लिया और सबसे गरीब मुहल्ले की तरफ सड़क नाली पानी की हालत देखने पहुंच गये। वहां पहुंचकर उन्होंने एक मुसलमान को अपने पास बुलाया और बोले- मुझे भूख लगी है।
नीम करोली बाबा कहो या नीब करोरी बाबा हर शब्द में केवल एक ही अर्थ निकलता है कि बाबा हम आपके है और आप हमारे है । अपने हर भक्त और उसके परिवार के पालन पोषण का बाबा सदैव ध्यान रखते है ।
एक बार की विचित्र घटना है लखनऊ में महाराजजी ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों को साथ लिया और सबसे गरीब मुहल्ले की तरफ सड़क नाली पानी की हालत देखने पहुंच गये। वहां पहुंचकर उन्होंने एक मुसलमान को अपने पास बुलाया और बोले- मुझे भूख लगी है।
मुसलमान ने कहा, लेकिन महाराजजी मेरे पास खिलाने के लिए कुछ भी नहीं है।
महाराजजी ने कहा, “तूने घर के छप्पर में दो रोटी नहीं छिपा रखी है दुष्ट?”उसे बहुत आश्चर्य हुआ कि महाराजजी को कैसे पता चला? वह छप्पर में से दो रोटी निकाल लाया। एक रोटी महाराजजी ने खाई और दूसरी रोटी अधिकारियों को दे दी जिसमें हिन्दू ब्राह्मण भी थे। महाराजजी ने कहा, “प्रसाद लो।”
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(रामदास, मिराकल आफ लव, दूसरा संस्करण, 1995, पेज- 43-45)
इस प्रकार नीम करोली बाबा ने अपने भक्तो में प्रसाद का वितरण किया और सबकी मनोकामनाएं पूर्ण की ।
जय श्री कैंची धाम की

