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लंदन में नीम करोली बाबा के दर्शन | London mein neem karoli baba ke darshan

लंदन में नीम करोली बाबा के दर्शन | London mein neem karoli baba ke darshan
ये अद्भुत घटना लंदन में घटे एक चमत्कार की है जिसने उस विदेशी भक्त के ह्रदय में भक्ति का संचार कर दिया। हीथर थॉम्पसन (ब्रिटेन) से बताते है की एक दिन मैं डबल डेकर बस से लंदन में यात्रा कर रहा था।  मैं प्रवेश द्वार के पास ही बैठा हुआ था। बस का कंडक्टर ऊपरी डेक पर था। बस लगभग पूरी खाली थी।  इतने में बस एक जगह रुकी और एक भिखारी बस में सवार हुआ।  उसने बेहद फटे हुवे कपडे पहन रखे थे और उसके हाथ में एक नीला और एक लाल कंबल था।  वह मेरे सामने आकर खड़ा हो गया और बहुत ही अच्छी मुस्कुराहट से मेरी तरफ देखने लगा।  मानों वह मेरी बगल वाली सीट पर बैठना चाहता था।  मैं एक तरफ खिसक गया और वह आदमी मेरी बगल में बैठ गया। 
मैं अपना मुंह घुमाकर खिड़की की तरफ देखने लगा।  खिड़की की तरफ देखते हुए मुझे उस बुजुर्ग आदमी के बारे में सोचते हुए उसकी मोहक मुस्कान याद आ रही थी। अचानक मेरे मन में महाराजजी अर्थात नीम करोली बाबा के बारे में विचार आने लगा। उनके बारे मैंने सुन रखा था कि वे भी एक बुजुर्ग आदमी हैं जो कंबल रखते हैं।  महाराजजी की याद आते ही मैंने उस बुजुर्ग को देखने के लिए अपना चेहरा घुमाया।  अरे! वह बुजुर्ग तो गायब हो चुके थे। 
रास्ते में बस भी कहीं नहीं रुकी थी इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता था कि वह बुजुर्ग कहीं उतर गये होंगे। पूरी बस में वे कहीं नजर नहीं आ रहे थे. पूरी सड़क भी खाली थी।  उस बुजुर्ग भिखारी का कहीं कोई पता नहीं चला. मैं जानता था कि मुझे कोई भ्रम नहीं हुआ लेकिन वह कहां चला गया?
अगले दिन मेरे कुछ मित्र मेरे पास आये और उन्होंने बताया कि बीते दिन सुबह (ठीक वही वक्त जिस वक्त मैं बस में था) उन्हें प्रेरणा मिली कि वे मेरे लिए टिकट की व्यवस्था करें और अपने साथ महाराजजी का दर्शन करने के लिए लेकर आयें। यह सब बहुत अटपटा था।  हालांकि मेरे दोस्तों ने जो रकम आफर की थी वह अच्छी खासी थी लेकिन इतने से मेरे जैसे विद्यार्थी के लिए भारत जाने का पर्याप्त इंतजाम नहीं हो रहा था। 
लेकिन अभी महाराजजी का एक चमत्कार होना और बाकी थी।  इंग्लैंड में मेरे स्कूल से हर साल सेमेस्टर पूरा होने पर घर जाने का पूरा खर्चा मिलता था।  मैंने इसके लिए आवेदन किया लेकिन मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब मुझे उसकी दोगुनी रकम का चेक मिला जितना मैंने आवेदन किया था।  मैंने इस बारे में स्कूल प्रशासन को बताया तो उन्होंने स्कूल का एकाउण्ट देखकर सूचित किया कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। अंतत: मुझे अहसास हो गया कि नीम करोली बाबा मुझे दर्शन के लिए बुला रहे हैं। 
एक महीने के भीतर मैं दिल्ली एयरपोर्ट पर था जहां से मैं सीधे कैंची धाम आश्रम आ गया।  जब मैं महाराजजी के दर्शन के लिए जा रहा था तो मैंने मन ही मन तय किया कि मैं महाराजजी से उस भिखारी के बारे में जरूर पूछूंगा। लेकिन जैसे ही मैं महाराजजी के सामने पहुंचा तो मैंने देखा कि उन्होंने वही कंबल ओढ़ रखा है जो उस दिन लंदन में भिखारी के हाथ में देखा था।  उनके चेहरे पर बिल्कुल वही मुस्कान थी जो उस दिन बस में दिखाई दी थी।  उन्होंने बिल्कुल उसी अंदाज में मेरी तरफ देखा।  मेरे पास पूछने के लिए कुछ नहीं बचा था।  ये वही थे जो उस दिन मुझे लंदन की बस में मिले थे।  मेरे साथ जो हुआ और जो दिख रहा था उससे मैं नीम करोली बाबा की करुणा और कृपा से भर गया। 
हीथर थॉम्पसन (ब्रिटेन)
#महाराजजीकथामृत

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साक्षात नारायण मेरे बाबा के बारे मे वो शब्द नही मिलते जिससे महाराज जी के व्यक्तित्व की व्याख्या की जा सके ! (१) देवरहा बाबा जी के अनुसार " नीम करौली जैसे संत कई युगो मे धरती पर आते है। मरे व्यक्ति को प्राण लौटाने की शक्ति नीम करौली जैसे संत के पास ही है। " (२) शिवानन्द आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द जी बाबा को  " पावर आफ पावर्स " और""  लाईट आफ लाईटस " कहा करते थे।  (३) करपात्री महाराज के अनुसार " संत तो कई हुये पर सिद्ध संत नीम करौली बाबा ही हुये।  
पर सत्य तो ये है की अपने भक्त के लिये तो बाबा भगवान थे। बाबा के दर्शन करने के बाद बाबा के भक्त भगवान् को भी भूल जाते थे क्योकि उन भक्तो को बाबा में ही भगवान् दिखने लग जाते थे। कोई उन्हे भोले बाबा , कोई कम्बल वाले बाबा , कोई हनुमान बाबा , कोई संकट हरने वाले बाबा , कोई जीवन देने वाले बाबा , कहा करते थे।  जिससे जिस रूप मे बाबा मिलते थे , वे बाबा को उसी नाम से पुकारता था। पर हमे तो वो नीम करोली बाबा के रूप मे मिले तो हमे सबसे प्रिय रूप बाबा का ही लगा , जय श्री कैंची धाम की 
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