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वैजयंती माला क्या है? धारण करने की शास्त्रीय विधि, 108 मनकों का रहस्य और अद्भुत लाभ

अंतिम अद्यतन: सनातन धर्म एवं वैदिक शास्त्र परंपरा अनुसार

सनातन परंपरा में वृक्षों, पौधों और उनके बीजों का आध्यात्मिक महत्व केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके पीछे गहरा वैज्ञानिक और ऊर्जात्मक आधार भी है। इन्हीं पवित्र प्राकृतिक उपहारों में से एक है—वैजयंती माला (Vaijayanti Mala)। ब्रज के वनों में स्वतः उत्पन्न होने वाले वैजयंती के पौधों के बीजों से निर्मित यह माला केवल एक धार्मिक आभूषण नहीं, बल्कि विजय, सिद्धि और ईश्वर कृपा का दिव्य प्रतीक है।

शाब्दिक अर्थ की दृष्टि से देखें तो 'वैजयंती' दो शब्दों के मेल से बना है: 'वै' (विशेष) + 'जयंती' (विजय दिलाने वाली)। अर्थात्, वह माला जिसे धारण करने से साधक को जीवन के हर क्षेत्र—व्यापार, विवाह, मानसिक शांति और भक्ति—में विजय की प्राप्ति होती है। भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराम, माता लक्ष्मी, दुर्गा और मां काली के गले की शोभा बढ़ाने वाली यह माला आज भी हर साधक के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

यदि आप अपनी जीवन-यात्रा में बाधाओं का सामना कर रहे हैं, मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं या फिर आध्यात्मिक उन्नति की तलाश में हैं, तो यह विस्तृत गाइड आपके लिए ही है। इस लेख में हम वैजयंती माला के पौराणिक महत्व, इसे सिद्ध करने की सही विधि, महिलाओं के लिए इसके फायदे और 108 मनकों के रहस्य पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

संक्षिप्त विवरण (Quick Overview)

  • मुख्य अधिष्ठाता: भगवान श्रीकृष्ण, श्री हरि विष्णु एवं माता लक्ष्मी
  • उत्पत्ति स्थल: ब्रज मंडल (वृंदावन, गोवर्धन) के पावन वन
  • धारण करने का सर्वश्रेष्ठ दिन: गुरुवार या शुक्रवार (शुक्ल पक्ष)
  • सिद्ध मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय / ॐ वैष्णवायै नम:
  • कुल मनके: 108 (वैदिक एवं ब्रह्मांडीय गणना आधारित)

1. वैजयंती माला का पौराणिक महत्व और इतिहास

वैदिक साहित्य और पौराणिक कथाओं में वैजयंती माला को अत्यधिक पूजनीय स्थान दिया गया है। श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, ब्रज की गोपियां और भगवान श्रीकृष्ण वनों में विहार करते समय प्राकृतिक वैजयंती के पुष्पों और बीजों की माला बनाकर धारण करते थे।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस माला का संबंध त्रिदेवों और आदिशक्ति तीनों से है:

  • विष्णु और कृष्ण अवतार: भगवान विष्णु के पाँच मुख्य आयुधों और आभूषणों में कौस्तुभ मणि के साथ वैजयंती माला का उल्लेख मिलता है। यह माला भगवान विष्णु की कृपा और उनके भक्तों की सुरक्षा का कवच मानी जाती है।
  • लक्ष्मी कारक गुण: वैजयंती माला को साक्षात धन-धान्य की अधिष्ठात्री देवी माता लक्ष्मी का प्रिय आभूषण माना गया है। जो साधक इसे धारण करता है, उसके जीवन से दरिद्रता और आर्थिक संकट धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं।
  • शक्ति और तंत्र साधना: शाक्त परंपरा में मां काली और माता दुर्गा के पूजन में भी वैजयंती माला का प्रयोग किया जाता है। सात्विक साधनाओं के साथ-साथ यह वशीकरण दोष निवारण और सकारात्मक आकर्षण ऊर्जा बढ़ाने में भी सहायक है।

2. वैजयंती माला कौन पहन सकता है? (पात्रता और वर्ग)

अक्सर लोगों के मन में यह भ्रम होता है कि क्या वैजयंती माला को केवल संन्यासी या विशेष साधक ही पहन सकते हैं? उत्तर है—नहीं। वैजयंती माला एक सात्विक प्राकृतिक उपहार है, जिसे कोई भी गृहस्थ, स्त्री, पुरुष या बालक धारण कर सकता है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित लोगों के लिए यह विशेष रूप से चमत्कारी सिद्ध होती है:

क) सार्वजनिक एवं सामाजिक जीवन से जुड़े व्यक्ति

यदि आप राजनीति, समाजसेवा, वकालत या ऐसे किसी भी क्षेत्र में हैं जहां जनता से सीधा संपर्क होता है, तो यह माला आपके व्यक्तित्व में एक सकारात्मक सम्मोहन और आकर्षण पैदा करती है। समाज में आपका मान-सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है।

ख) कामकाजी महिलाएं और गृहिणियां

कार्यस्थल पर मानसिक दबाव झेल रही महिलाओं के लिए यह माला मानसिक सुकून देने वाली मानी गई है। यह काम में एकाग्रता बढ़ाती है और आसपास के माहौल से नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखती है।

ग) विवाह में विलंब का सामना कर रहे युवा

यदि किसी युवक या युवती के विवाह में बार-बार बाधाएं आ रही हों, बनते काम बिगड़ रहे हों या योग्य जीवनसाथी की तलाश पूरी न हो रही हो, तो गुरुवार के दिन विधि-विधान से पूजित वैजयंती माला धारण करने से बृहस्पति और शुक्र ग्रह के दोष दूर होते हैं।

घ) रचनात्मक और कलात्मक क्षेत्रों के लोग

लेखक, कवि, चित्रकार, अभिनेता, संगीतकार और डिजाइनर—ऐसे लोग जिनका काम पूरी तरह से उनकी कल्पनाशीलता और विचारों की मौलिकता पर निर्भर करता है, उनके लिए यह माला अत्यंत शुभ मानी गई है। यह मस्तिष्क में नए और सकारात्मक विचारों का संचार करती है।


3. असली वैजयंती माला की पहचान कैसे करें?

बाजार में प्लास्टिक या नकली बीजों से बनी मालाओं की भरमार है। नकली माला धारण करने से न तो कोई आध्यात्मिक लाभ मिलता है और न ही ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए असली वैजयंती माला की पहचान होना बेहद जरूरी है:

लक्षण (Feature) असली वैजयंती माला की पहचान
आकार (Shape) इसके बीजों का आकार पूरी तरह गोल नहीं होता, बल्कि यह 'सुबह की अधखिली कमल की कली' जैसा थोड़ा लंबा और अंडाकार होता है।
बनावट (Texture) इसके बीज प्राकृतिक रूप से चिकने, बेहद मजबूत और कठोर होते हैं। ये आसानी से टूटते नहीं।
प्राकृतिक छिद्र (Natural Hole) वैजयंती के बीज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके बीच में धागा पिरोने के लिए प्राकृतिक रूप से छेद होता है, इसे मशीन से छेदने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
रंग (Color) यह प्राकृतिक रूप से हल्के सफेद, भूरे (Greyish-White) या आंशिक रूप से चमकदार शेड में पाई जाती है।

4. वैजयंती माला को सिद्ध और धारण करने की संपूर्ण विधि

किसी भी दिव्य वस्तु को बिना प्राण-प्रतिष्ठा या सिद्ध किए धारण करने से उसका पूर्ण लाभ नहीं मिलता। वैजयंती माला को धारण करने से पहले इसे पवित्र और जागृत करना आवश्यक है।

धारण करने का शुभ समय और दिन:

वैजयंती माला को धारण करने के लिए शुक्ल पक्ष का प्रथम गुरुवार (Thursday) या शुक्रवार (Friday) सर्वश्रेष्ठ माना गया है। गुरुवार भगवान विष्णु का दिन है और शुक्रवार माता लक्ष्मी का।

सिद्ध करने के 7 चरणबद्ध नियम (Step-by-Step Procedure):

  1. प्रातः स्नान एवं संकल्प: शुभ दिन (गुरुवार/शुक्रवार) को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और पीले या स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. स्थान शुद्धि: अपने घर के पूजा स्थान को साफ करें और उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें।
  3. माला का पंचामृत स्नान: वैजयंती माला को एक तांबे या पीतल के पात्र में रखें। इसके बाद इसे गंगाजल, कच्चे दूध, शहद, दही और घी (पंचामृत) से शुद्ध करें। अंत में पुनः स्वच्छ गंगाजल से धोएं।
  4. पीले वस्त्र पर स्थापन: माला को सुखाकर एक साफ पीले या लाल कपड़े पर स्थापित करें। माला पर चंदन, अक्षत (चावल) और पीले फूल अर्पित करें।
  5. मंत्र जाप (जागृति): यदि आपके कोई गुरु हैं, तो गुरु मंत्र का जाप करें। यदि गुरु नहीं हैं, तो हाथ में जल लेकर संकल्प लें और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ वैष्णवायै नम:' मंत्र की कम से कम 108 बार (1 माला) का जाप करें।
  6. भगवान को समर्पित करना: जाप पूरा होने के बाद माला को भगवान श्रीकृष्ण या श्री हरि विष्णु के चरणों से स्पर्श कराएं और अपने मनोरथ सिद्धि की प्रार्थना करें।
  7. दान और धारण: माला धारण करने के पश्चात् अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी मंदिर में या गरीबों को मीठे भोजन (जैसे खीर या हलवा) का दान करें। इसके बाद माला को श्रद्धापूर्वक धारण करें।

5. क्या महिलाएं वैजयंती माला धारण कर सकती हैं? (विशेष विश्लेषण)

जी हां, महिलाएं पूरी तरह से वैजयंती माला धारण कर सकती हैं। वास्तव में, शास्त्रों के अनुसार महिलाओं के लिए यह माला अत्यंत कल्याणकारी और सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है।

महिलाओं के जीवन में इसके निम्नलिखित अद्भुत लाभ देखने को मिलते हैं:

1. शीघ्र विवाह के योग:

जिन कन्याओं के विवाह में अकारण देरी हो रही हो, रिश्ते आते हों लेकिन अंतिम समय में बात टूट जाती हो, उनके लिए यह माला वरदान समान है। गुरुवार के दिन विष्णु-लक्ष्मी का ध्यान करके इसे धारण करने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है और शीघ्र सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।

2. मानसिक तनाव और क्रोध से मुक्ति:

वैजयंती के बीजों में प्राकृतिक शीतलता होती है। जो महिलाएं अत्यधिक मानसिक तनाव, चिड़चिड़ापन या क्रोध का सामना करती हैं, यह माला उनके मन को शांत करती है और उनके हृदय में सौम्यता व दया का भाव जगाती है।

3. करियर और कामकाजी जीवन में सफलता:

वर्किंग वुमन (कामकाजी महिलाओं) को दफ्तर में राजनीति और नकारात्मकता का सामना करना पड़ता है। वैजयंती माला धारण करने से उनके इर्द-गिर्द एक सकारात्मक सुरक्षा चक्र बनता है, जिससे सहकर्मियों के साथ संबंध सुधरते हैं और पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

4. कलात्मक प्रतिभा का विकास:

फैशन डिजाइनिंग, राइटिंग, पेंटिंग, कुकिंग या टीचिंग जैसे रचनात्मक कार्यों में लगी महिलाओं को यह माला नई अंतर्दृष्टि प्रदान करती है, जिससे उनके काम में निखार आता है।

ध्यान रखने योग्य बात: महिलाओं को सूतक (शौच/अशौच) या मासिक धर्म के समय माला को उतारकर किसी पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए। शुद्ध होने के पश्चात गंगाजल छिड़ककर इसे पुनः धारण किया जा सकता है।


6. वैजयंती माला में 108 मोती ही क्यों होते हैं? (गूढ़ रहस्य)

सनातन धर्म में जाप या धारण करने वाली मालाओं में 108 मनके (मोती) होना कोई संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा ज्योतिषीय, खगोलीय और आध्यात्मिक गणित छिपा हुआ है। वैजयंती माला के 108 मनकों के मुख्य कारण इस प्रकार हैं:

खगोलीय एवं ज्योतिषीय गणना

  • नक्षत्र और चरण: भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संपूर्ण ब्रह्मांड को 27 नक्षत्रों में बांटा गया है। प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं। जब हम 27 नक्षत्रों को उनके 4 चरणों से गुणा करते हैं (27 × 4), तो संख्या 108 प्राप्त होती है। 108 मनकों की माला पहनने का अर्थ है—संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा को धारण करना।
  • सूर्य और पृथ्वी का संबंध: सूर्य एक वर्ष में अपनी कलाएं बदलता है। सूर्य की 12 राशियां और 9 ग्रह (12 × 9) का गुणनफल भी 108 आता है।

दैवीय और आध्यात्मिक कारण

  • ईश्वर के 108 नाम: वैदिक ग्रंथों में भगवान विष्णु, शिव और आदि शक्ति के 108 कल्याणकारी नामों का उल्लेख है। 108 मनकों का जाप करने से ईश्वर के सभी स्वरूपों का नमन एक साथ हो जाता है।
  • सांसों की संख्या से संबंध: एक स्वस्थ मनुष्य 24 घंटे में औसतन 21,600 बार सांस लेता है। शास्त्रों के अनुसार, दिन और रात (12-12 घंटे) में से 12 घंटे दैनिक कार्यों के लिए छोड़कर शेष 12 घंटों में मनुष्य 10,800 सांसें लेता है। इसमें से अंतिम दो शून्य हटाकर 108 की संख्या निर्धारित की गई है, ताकि मनुष्य अपने हर सांस के साथ ईश्वर का स्मरण कर सके।
  • 100 जाप और 8 त्रुटि पूर्ति: जब हम माला पर 108 बार जाप करते हैं, तो माना जाता है कि 100 बार का जाप शुद्ध मन से हुआ और शेष 8 मनके जाप के दौरान हुई भूल-चूक या अशुद्धि की भरपाई के लिए अर्पित किए जाते हैं।

7. वैजयंती माला धारण करने के 10 प्रत्यक्ष आध्यात्मिक लाभ

  1. विजय और शत्रु बाधा मुक्ति: जैसे इसके नाम से स्पष्ट है, यह जीवन के हर युद्ध (संघर्ष) में साधक को जीत दिलाती है। गुप्त शत्रुओं का प्रभाव समाप्त होता है।
  2. आर्थिक समृद्धि: लक्ष्मी कारक होने के कारण यह फिजूलखर्ची रोकती है और आय के नए स्रोत खोलती है।
  3. मानसिक शांति और डिप्रेशन से राहत: इसके बीजों की दिव्य सुगंध और ऊर्जा मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को शांत रखती है, जिससे अवसाद और तनाव दूर होता है।
  4. नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा: यह एक रक्षा कवच की तरह काम करती है। तंत्र-मंत्र, बुरी नजर और ऊपरी हवाओं के प्रभाव को निष्क्रिय करती है।
  5. ग्रहों का संतुलन: विशेष रूप से गुरु (Jupiter), शुक्र (Venus) और चंद्रमा (Moon) से जुड़े दोषों को शांत करने में यह अत्यंत प्रभावशाली है।
  6. आकर्षण और वशीकरण प्रभाव: यह धारण करने वाले के चेहरे पर एक सात्विक तेज लाती है, जिससे लोग आपकी ओर आकर्षित और प्रभावित होते हैं।
  7. मंत्र सिद्धि में तीव्रता: यदि इस माला से 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या गायत्री मंत्र का जाप किया जाए, तो मंत्र शीघ्र सिद्ध होता है।
  8. पति-पत्नी के संबंधों में मधुरता: दांपत्य जीवन में आ रही कड़वाहट को दूर कर प्रेम और सामंजस्य बढ़ाती है।
  9. विद्यार्थियों के लिए लाभ: पढ़ाई में ध्यान न लगना या भूलने की बीमारी में यह एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है।
  10. सात्विक जीवनशैली का विकास: इसे धारण करने के बाद साधक का मन स्वतः ही बुरे व्यसनों (मांस, मदिरा आदि) से हटने लगता है और सात्विकता की ओर बढ़ता है।

8. वैजयंती माला धारण करने के जरूरी नियम और सावधानियां

यदि आप वैजयंती माला का पूर्ण लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन नियमों का पालन अवश्य करें:

  • शुद्धता बनाए रखें: मदिरापान या मांसाहार करते समय माला को शरीर से अलग कर देना चाहिए। सात्विक आचरण ही इसके प्रभाव को बनाए रखता है।
  • दूसरों की माला न पहनें: अपनी पूजित और सिद्ध की हुई माला कभी किसी अन्य व्यक्ति को पहनने के लिए न दें और न ही किसी दूसरे की इस्तेमाल की हुई माला पहनें।
  • सोते समय सावधानी: रात को सोते समय यदि असहज लगे तो माला उतारकर अपने पूजा घर में या सिरहाने रख सकते हैं। इससे डरावने सपने नहीं आते।
  • धागे का ध्यान रखें: यदि माला का धागा पुराना या कमजोर हो जाए, तो उसे तुरंत बदलकर नए पीले या रेशमी धागे में पिरो लें। मनकों का नीचे गिरना अशुभ माना जाता है।
  • नियमित स्पर्श और जाप: प्रतिदिन पूजा के समय माला को धूप-दीप दिखाएं और कम से कम 11 बार 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: क्या वैजयंती माला और तुलसी की माला एक ही होती है?

उत्तर: नहीं, दोनों बिल्कुल अलग हैं। तुलसी की माला तुलसी के पौधे की लकड़ी (तने) से बनाई जाती है, जबकि वैजयंती माला वैजयंती नामक पौधे के प्राकृतिक कठोर बीजों से बनती है। दोनों के प्रभाव और गुण भी भिन्न हैं।

प्रश्न 2: वैजयंती माला को किस धागे में पिरोना चाहिए?

उत्तर: इसे पीले, लाल या सूती/रेशमी धागे में पिरोना सबसे उत्तम माना जाता है। यदि संभव हो तो मनकों के बीच में एक-एक गांठ अवश्य लगाएं।

प्रश्न 3: क्या वैजयंती माला को केवल पूजा स्थान पर रखा जा सकता है?

उत्तर: हां, यदि आप इसे गले में नहीं पहनना चाहते हैं, तो सिद्ध करने के बाद इसे अपने घर के लॉकर (तिजोरी), व्यापारिक गल्ले या पूजा घर में रख सकते हैं। यह वहां भी उतनी ही सकारात्मक ऊर्जा फैलाएगी।


निष्कर्ष: वैजयंती माला सनातन संस्कृति का वह अनमोल रत्न है जो मनुष्य को भौतिक सुखों के साथ-साथ आध्यात्मिक परम शांति की ओर ले जाता है। यदि पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान से इसे धारण किया जाए, तो भगवान श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में विजय और समृद्धि का आगमन निश्चित है।

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