Skip to main content
Independent Devotee-Run Website ShriKainchiDham.org is an independent informational and devotional blog created by devotees of Neem Karoli Baba. It is not the official website of Shri Kainchi Hanuman Mandir Trust.
Official Temple Website

Most Popular Post

कैंची धाम और चार धाम यात्रा पैकेज 2026: कम खर्च में कैसे करें प्लान? (टूर पैकेज और हेलीकॉप्टर बुकिंग)

Navratri: Brahmacharini Mata | Navratri Second Day

Navratri 2022: Brahmacharini Mata

प्रिय भक्तो , नवरात्रि के द्वितीय दिवस पर आज हम आपको माता आदिशक्ति के दिव्य श्वेत स्वरूप ब्रह्मचारिणी माता के विषय में बताएंगे। नवरात्रि के द्वितीय दिवस पर ब्रह्मचारिणी माता के दिव्य एवं मनमोहक स्वरूप की पूजा की जाती है।

Brahmacharini ka arth

ब्रह्म का अर्थ है तप और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। अतः हम कह सकते है की जो तप का आचरण करती है उनको ही ब्रह्मचरणी माता के रूप में पूजा जाता है।

Brahmacharini Mata ke Swaroop ka Varnan

ब्रह्मचारिणी माता के ये स्वरूप ज्योतिर्मय है और माता के दाहिने हाथ में जप माला और बाए हाथ में कमंडल है । माता ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप ,त्याग, और सय्यम की वृद्धि होती है ।

Brahmacharini Mata ka naamkaran sanskar

पर्वत राज हिमालय की पुत्री देवी पार्वती ने भगवान शंकर को अपने पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षो तक घोर तप किया जिसके कारण माता को ब्रह्मचारिणी के नाम से संबोधित किया गया। माता आदिशक्ति के इसी स्वरूप की कठिन तपस्या से भगवान शिव ने प्रसन्न होकर माता पार्वती से विवाह किया था।
Navratri 2021: Brahmacharini Mata | Navratri Second Day 2021

Brahmacharini Mata Ke Rang ka varnan

ब्रह्मचारिणी माता के दिव्य स्वरूप का रंग सफेद बताया गया है। देवी पुराण के 45वें अध्याय के अनुसार माता ब्रह्मचारिणी सदैव तप में लीन रहती है जिसके फल स्वरूप माता का रंग पवित्र श्वेत हो गया है। लगातार तप करने के कारण माता का स्वरूप तेजोमय हो गया है । इसी कारण माता के रूप का रंग श्वेत यानी गौर वर्ण का बताया गया है।

 Mata Brahmacharini ka mantra

"या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।"

॥स्तुति मंत्र।

दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि, ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

(जिनके एक हाथ में अक्षमाला है और दूसरे हाथ में कमण्डल है, ऐसी उत्तम ब्रह्मचारिणीरूपा मां दुर्गा मुझ पर कृपा करें।)

भोग: उपवास के बाद माता को शक्कर का भोग लगाया जाता है। इससे घर के सभी सदस्यों की आयु बढ़ती है।

Share This Article

Help others discover and share this article.

Comments

Popular posts from this blog

विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र | 1000 नाम हिंदी अर्थ सहित | Vishnu Sahasranamam

विष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम Vishnu Sahasranamam Stotram ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः प्रिय भक्तों, विष्णु सहस्रनाम भगवान श्री हरि विष्णु (नारायण) के एक हजार दिव्य नामों का पवित्र संग्रह है। महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह द्वारा युधिष्ठिर को सुनाया गया यह स्तोत्र हिन्दू धर्म के सर्वाधिक प्रभावशाली एवं लोकप्रिय स्तोत्रों में से एक है। नियमित पाठ से मानसिक शांति, पापों का नाश, बृहस्पति ग्रह की शांति, सुख-समृद्धि और मोक्ष मार्ग खुलता है। श्रद्धा एवं शुद्ध भाव से किया गया पाठ ही सबसे बड़ा फल देता है। विष्णु सहस्रनाम पाठ के लाभ मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं यश, सुख, ऐश्वर्य, आरोग्य एवं सौभाग्य की प्राप्ति बिगड़े कार्यों में सफलता कुंडली में बृहस्पति के दुष्प्रभाव का शमन भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति सभी ग्रहों एवं नक्षत्रों पर सकारात्मक प्रभाव पाठ के नियम पाठ से पहले स्नान कर पवित्र रहें सात्विक व्रत रखकर पाठ करें पीले वस्त्र धारण करें भगवान विष्णु की विधिवत पूजा क...

हनुमान वडवानल स्रोत महिमा - श्री कैंची धाम | Hanuman Vadvanal Stotra Mahima - Shri Kainchi Dham

हनुमान वडवानल स्रोत महिमा - श्री कैंची धाम | Hanuman Vadvanal Stotra Mahima - Shri Kainchi Dham   श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र की रचना त्रेतायुग में लंका अधिपति रावण के छोटे भाई विभीषण जी ने की थी। त्रेतायुग से आज तक ये मंत्र अपनी सिद्धता का प्रमाण पग-पग पे देता आ रहा है।  श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र के जाप से बड़ी से बड़ी समस्या भी टल जाती है। श्री हनुमान वडवानल स्रोत का प्रयोग अत्यधिक बड़ी समस्या होने पर ही किया जाता है। इसके जाप से बड़ी से बड़ी समस्या भी टल जाती है और सब संकट नष्ट होकर सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।  श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र के प्रयोग से शत्रुओं द्वारा किए गए पीड़ा कारक कृत्य अभिचार, तंत्र-मंत्र, बंधन, मारण प्रयोग आदि शांत होते हैं और समस्त प्रकार की बाधाएं समाप्त होती हैं। पाठ करने की विधि शनिवार के दिन शुभ मुहूर्त में इस प्रयोग को आरंभ करें। सुबह स्नान-ध्यान आदि से निवृत्त होकर हनुमानजी की पूजा करें, उन्हें फूल-माला, प्रसाद, जनेऊ आदि अर्पित करें। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर लगातार 41 दिनों तक 108 बार पाठ करें।...

Panch Mukhi Hanuman: ॐ नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्वाहा का अर्थ

  Sankat Mochan Hanuman भक्ति का स्वरूप, भक्ति का ज्ञान हमें श्री हनुमान जी महाराज से सीखना चाहिए। हनुमान जी महाराज ने भक्ति के द्वारा श्री राम को प्राप्त कियाऔर श्री राम के वरदान स्वरुप समस्त संसार में हनुमान जी की आराधना, उनकी जय जयकार और उनकी प्रतिष्ठा संपन्न हो सकी।  शास्त्रों की माने तो हनुमान जी महाराज भगवान शिव अर्थात महा रूद्र के 11 में रुद्र अवतार हैं और उन्हें शिव स्वरूप भी माना जाता है अर्थात हनुमान जी महाराज स्वयं महादेव के ही अवतार हैं। अतः जब कोई संकट किसी भी प्राणी को महसूस होता है तो वह संकट से छुटकारा पाने के लिए अपनी श्री हनुमान जी महाराज की शरण लेता है और उनसे उस संकट को दूर करने की प्रार्थना करता है। हनुमान जी महाराज अत्यंत ही दयालु हैं। वह अपने शरणागत की रक्षा अवश्य करते हैं। हम सभी को उनके दिव्य मंत्रो के द्वारा उनको प्रसन्न करके उनसे अपनी रक्षा की प्रार्थना करनी चाहिए।   हनुमान जी के भक्तों के द्वारा हनुमान जी को अनेको नाम से संबोधित किया जाता है।  वीर हनुमान, राम भक्त, शिव अवतार, मारुति नंदन, महावीर ये सभी नाम भजरंग बलि के ही है पर इन सभी...