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Vishnu Sahasranamam Stotram With Hindi Lyrics

Vishnu Sahasranamam Stotram Mahima ॐ  नमो भगवते वासुदेवाय नमः  प्रिय भक्तों विष्णु सहस्त्रनाम भगवान श्री हरि विष्णु अर्थात भगवान नारायण के 1000 नामों की वह श्रृंखला है जिसे जपने मात्र से मानव के समस्त दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं और भगवान विष्णु की अगाध कृपा प्राप्त होती है।  विष्णु सहस्त्रनाम का जाप करने में कोई ज्यादा नियम विधि नहीं है परंतु मन में श्रद्धा और विश्वास अटूट होना चाहिए। भगवान की पूजा करने का एक विधान है कि आपके पास पूजन की सामग्री हो या ना हो पर मन में अपने इष्ट के प्रति अगाध विश्वास और श्रद्धा अवश्य होनी चाहिए।  ठीक उसी प्रकार विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते समय आपके हृदय में भगवान श्री विष्णु अर्थात नारायण के प्रति पूर्ण प्रेम श्रद्धा विश्वास और समर्पण भाव का होना अति आवश्यक है। जिस प्रकार की मनो स्थिति में होकर आप विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करेंगे उसी मनो स्तिथि में भगवान विष्णु आपकी पूजा को स्वीकार करके आपके ऊपर अपनी कृपा प्रदान करेंगे।    भगवान विष्णु के सहस्त्र नामों का पाठ करने की महिमा अगाध है। श्रीहरि भगवान विष्णु के 1000 नामों (Vishnu 1000 Names)के स्मरण मात्र से मनु

Navratri 2021: Mata Shailputri Devi Pujan | Navratri First Day 2021

Navratri: Mata Shailputri Pujan

नवरात्रि के प्रथम दिवस की देवी माता शैलपुत्री है जिनकी पूजा प्रत्येक नवरात्रि के प्रथम दिवस पर पूर्ण विधि विधानों के साथ करके शुभ नवरात्रि का प्रारंभ किया जाता है ।

Mata Shailputri ka Divya rang: Narangi

माता शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री कही जाती है। हिमालय की पुत्री देवी शैलपुत्री जब अरुणोदय काल में प्रकट हुवी थी तब सूर्य की किरणों की वजह से उनका रंग नारंगी था।

Mata Shailputri Katha

चैत्र नवरात्रि की प्रथम शक्ति के रूप में माता शैलपुत्री की पूजा पूर्ण श्रद्धा के साथ की जाती है। माता आदिशक्ति अपने पूर्व जन्म में प्रजापति दक्ष की पुत्री थी जिनका नाम सती था और उनका विवाह सदाशिव के साथ संपन्न हवा था।

शिव पुराण में कथा आती है की एक बार जब दक्ष प्रजापति ने महा यज्ञ का आयोजन किया तब उन्होंने अपने जमता भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। देवी सती बिना निमंत्रण के ही अपने पिता के यज्ञ में जाने का आग्रह भगवान शिव से करने लगी।

भगवान सदाशिव के मना करने पर भी कि (बिना निमंत्रण किसी के घर जाने से अपमान होता है) माता ने हठ पकड़ली जिसका दुष्परिणाम हुवा की माता सती के यज्ञ में आगमन पर प्रजापति दक्ष ने भगवान सदाशिव के लिए अपशब्द कहे जिसके फलस्वरूप माता सती ने आत्मदाह करके अपने शरीर को अपनी ही दिव्य ऊर्जा के द्वारा भस्म कर दिया।

Navratri 2021: Mata Shailputri Devi Pujan | Navratri First Day 2021
इस घटना के बाद भगवान शिव ने क्रोध वश तांडव करना शुरू कर दिया। जिसके फलस्वरूप भगवान शिव के एक दिव्य रूप प्रकट हवा जिसका नाम वीरभद्र था। वीरभद्र ने महारुद्र भगवान शिव के आदेशानुसार प्रजापति दक्ष के यज्ञ को विध्वंश करके प्रजापति दक्ष को प्राण विहीन कर दिया।

देवी सती ही अपने अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मी और इनको ही पार्वती या शैलपुत्री कहा जाता है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण नवरात्रि में माता दुर्गा के प्रथम रूप में इनकी पूजा करने का विधान है।

माता शैलपुत्री ही शिवांगी है ,जिन्होंने अपने कठोर तप के कारण सदाशिव को पति रूप में प्राप्त किया। माता शैलपुत्री को ही सौभाग्य, प्रकृति और आयु की देवी कहा जाता है।

Mata Shailputri Mantra 

वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।

पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥

पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥

प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुंग कुचाम् ।

कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम् ॥

या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।

ओम् शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।


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